हिंडौनसिटी. करौली जिले के सबसे बडे हिंडौन उपखंड सहित टोडाभीम, सूरौठ और श्रीमहावीरजी के सरकारी अस्पतालों की हालत ठीक नहीं हैं। मरीज अपनी पीडा के उपचार के लिए सरकारी दवाखाने पहुंचता है तो उसे अपनी पीडा से ज्यादा अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं का रोग दिखाई पडता है।
हिंडौन के सरकारी अस्पताल में मरीजों को नब्ज दिखाने के लिए घंटों कतार में खडा रहना पडता है। कारण है अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डाक्टरों का नहीं होना। सवाल यह है कि इस अव्यवस्था के प्रति जिम्मेदार कौन है? वे लोग जिन्होंने बडे-बडे वादे का सत्ता हासिल की है या फिर वे जो हर माह वेतन के रूप में मोटी रकम हांसिल करने के बाद भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। हिंडौन ब्यूरो ने अपने सहयोगियों के साथ इन्हीं सवालों को छूते हुए तैयार की है एक टीम रिपोर्ट।
नब्ज दिखाने के लिए ही करना पडता है घंटों इंतजार
करौली जिले के सबसे बडे उपखंड हिंडौन में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की हालत काफी खस्ता बनीं हुई है। चिकित्सकों की संख्या पर्याप्त नहंी होने के कारण अस्पताल में सुबह से ही मरीजों को काफी संख्या में देखा जा सकता है।
अस्पताल में नेत्र रोगियों के लिए अलग से लंबा-चौडा इकाई भवन बना हुआ है, परंतु नेत्र विशेषज्ञ के अभाव में पिछले कई सालों से यह नेत्र इकाई सूनी पडी हुई है। इस सरकारी अस्पताल में मरीजों को निशुल्क मिलने वाली दवाईयों पर भी ईमानदारी बरता जाना संदेह में है। डाक्टरों द्वारा जेनरिक दवाईयां नहीं लिखने के कारण मरीजों को महंगे दामों पर बाजार से दवाईयां खरीदने को मजबूर होना पड रहा है।
सरकारी तौर पर घोषित 75 शैय्याओं वाले हिंडौन के उच्चीकृत राजकीय अस्पताल में विभिन्न रोगों के आधा दर्जन विशेषज्ञ चिकित्सक कार्यरत हैं। मगर कुछ तो लोह चीकने और कुछ कुल्हाडे भौटें कहावत की तरह आए दिन आयोजित होने वाले चिकित्सा शिविरों एवं कार्यक््रमों ने भी अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था को बिगाड़ने में भी कोई कसर नहीं छोडी है।
सूरौठ कस्बे एवं आसपास के दर्जनों गांवों की चिकित्सा व्यवस्था को देख रहे राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का इन दिनों हाल ठीक नहीं है। यही वजह है कि राजकीय स्वास्थ्य केन्द्र की बजाय मरीजों की कस्बे के नीम हकीमों और निजी डाक्टरों के यहां भीड़ लगी रहती है।
सरकारी आवासों में डाक्टरों के नहीं रहने के कारण अस्पताल समय के बाद आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड रहा है। 6 बैड वाले इस अस्पताल को उच्चीकृत स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत करने की मांग पिछले कई सालों से की जाती रही है, किंतु इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
श्रीमहावीरजी क्षेत्र में कस्बा और ढाणियों का जिस प्रकार विस्तार हो रहा है उस अनुसार यहां स्थापित सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर्याप्त नहीं हैं। अधिकांश गांवों से जुडे रहने के कारण स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत किए जाने की महित्वपूर्ण आवश्यकता है। कस्बे का सरकारी अस्पताल दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र के निजी भवन में संचालित हो रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो सीएएस चिकित्सक नियुक्त होने पर रोगियों को चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में जटिल रोगों से पीडित रोगियों को रैफर कर दिया जाता है। क्षेत्र में आयुर्वेद औषधालय, प्राकृतिक चिकित्सा एवं प्रसूति गृह व रोगों के जांच के लिए निदान केंद्र भी संचालित हैं।
मुफ्त में नहीं मिलती दवाईयां
टोडाभीम. बीपीएल कार्डधारियों को सरकारी अस्पताल में न तो मुफ्त दवाईयां मिलती हैं और न ही राज्य सरकार की क्षय रोग उन्मूलन योजना के दौरान पीडित रोगियों को अस्पताल से मिलने वाली दवाईयों की किट मिल पाती हैं। अस्पताल में रेडियाग्राफर का पद तो है, लेकिन एक्सरे मशीन मौजूद नहीं है। इसके अलावा कई चिकित्सकों के पद रिक्त होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड रही है। अस्पताल में जांच के नाम पर सामान्य जांचें उपलब्ध हैं, किंतु महत्वपूर्ण जांचों के लिए निजी डाग्नोस्टिकों के यहां भेजा जा रहा है।
5 साल से बेकार पड़ी है सोनोग्राफी मशीन
राजकीय उच्चीकृत अस्पताल में पांच साल से सोनोग्राफी मशीन का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में कोई सोनोलोजिस्ट नहीं होने के कारण मशीन का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध होने के बावजूद बाजार से 300 रुपए तक में सोनोग्राफी कराने को मजबूर है। इस बारे में चिकित्सा अधिकारियों ने गत दिनों दौरे पर आई परियोजना निदेशक रोली सिंह को भी अवगत कराया।
यह आवश्यकता जरूरी
राजकीय उच्चीकृत अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 75 बैड से बढ़ाकर 100 बैड किया जाना अत्यंत जरूरी है। इसके अलावा पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की भी आवश्यकता है। अस्पताल में ईएनटी, नेत्र ओर्थो, एनएसथीमिया विशेषज्ञ के साथ मेडीकल आफिसर और सोनोलोजिस्ट की आवश्यकता है। इसके अलावा 24 घंटे बिजली आपूर्ति व्यवस्था के साथ चारदीवारी और गेट जरूरी है। चिकित्साकर्मियों को अस्पताल परिसर में ही सरकारी आवासों का निर्माण कराया जाना आवश्यक है।
रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए उच्चधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इसके अलावा सोनोग्राफी मशीन का उपयोग प्रारंभ करने के पूरे प्रयास किए जा रहे है। अस्पताल में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर मरीजों को लाभ पहुंचाया गया है।
—डा. छाजूलाल मीणा,चिकित्सा अधिकारी, हिंडौनसिटी