संपादकीय. भारत-पाक सीमा पर चल रहा संघर्ष विराम पाकिस्तानी गोलाबारी से तार-तार हो उठा। बगैर किसी उकसावे के तंगधार क्षेत्र की नियंत्रण रेखा पर स्थित पाकिस्तान के बंकरों से भारतीय सैनिक चौकियों पर इकतरफा गोलीबारी की गई। यह अकारण हमला भारी मशीनगनों और मोर्टारों से किया गया। पाकिस्तानी चौकियों के मुकाबले भारतीय चौकियां करीब नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित हैं।
शायद इसलिए जानमाल का नुकसान नहीं हो पाया। भारत-पाकिस्तान के बीच परस्पर विश्वास बहाली के उपायों के तहत नवंबर 2003 में किए गए संघर्ष विराम का यह सरासर उल्लंघन है। इस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चिंता व्यक्त करके उचित ही किया है। कहीं ऐसा न हो कि संघर्ष विराम का उल्लंघन एक बार फिर शांति प्रक्रिया की बहाली में रोड़ा बन जाए।
गौर करने वाली बात यह है कि इस घटना से चंद दिनों पहले पाकिस्तान रेंजरों द्वारा सांबा सेक्टर में अपने ‘फायर कवर’ से आतंकवादियों को सीमा पार कराने की कोशिशों पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने कड़ा एतराज जताया था। उसके बाद भी इस तरह की शरारतपूर्ण घटना को कैसे बर्दाश्त किया जाए।
पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी आमतौर पर ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी आतंकवादियों के मत्थे डालकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन यदि यह सच है तो क्या यह भी सच है कि सीमा की नियंत्रण रेखा पर बने पाकिस्तानी सैन्य बंकरों में पाकिस्तानी सैनिक नहीं बल्कि जेहादी आतंकवादी रहते हैं, क्योंकि हमला तो पाकिस्तानी बंकरों से हुआ है।
यह सही है कि गर्मियों में जब सीमा पर बर्फ पिघलती है तो भारतीय सीमा में घुसने की ताक में बैठे आतंकवादी इसके लिए उतावले हो जाते हैं। पाकिस्तानी सेना चाहे जितनी सफाई दे, पर इस काम में वह आतंकवादियों की मददगार बन जाती है, क्योंकि उनके सहयोग के बिना यह काम संभव ही नहीं है। यह भी सही है कि पिछले एक महीने के भीतर सौ से लेकर डेढ़ सौ आतंकी कश्मीर घाटी में प्रवेश कर चुके हैं।
इसलिए संघर्ष विराम का उल्लंघन न हो, इस पर पाकिस्तान सरकार को सकारात्मक रवैया अपनाना होगा। आतंकवादियों पर न सही, कम से कम सेना पर तो जरूर अंकुश लगाना होगा। इस संदर्भ में पिछले दिनों पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल कियानी द्वारा सीमा पर तैनात सैनिकों को ‘कश्मीर कॉज’ के लिए आश्वस्त करना गौरतलब है। उम्मीद करनी चाहिए कि जब 21 मई को इस्लामाबाद में दोनों देशों के विदेशमंत्रियों के बीच सद्भाव वार्ता होगी, तो यह मुद्दा जरूर उठेगा।