जयपुर.
पुर यानी शहर। इसमें जब जय जुड़ती है तो जयपुर हो जाता है। संकट और विपत्ती के हर क्षण से विजय पाना जयपुर के खून में है। कांप गए होंगे कभी अमेरिका, लंदन, यहां तक कि मुंबई भी। लेकिन चारदीवारी के चार-छह कोनों में विस्फोट करके कोई आतंकवाद जयपुर को डिगा नहीं सकता।
यह साबित किया है दूसरे ही दिन उसी जज्बे से खड़े होकर यहां के व्यापारियों ने, वाशिंदों ने, डॉक्टरों ने और कफ्यरू में भी आस्था के सम्मान करते हुए दर्शन की अनुमति देने वाले पुलिस वालों ने। जज्बा देखिए कि मंगलवार को विस्फोटों से तहस-नहस शहर की दो मांएं गुरुवार रात बेटियों को जन्म देतीं हैं और शुक्रवार सुबह पहुंच जाती हैं परीक्षा देने..
रात को जुड़वां बेटियां, सुबह बीएड
गोनेर रोड निवासी रेखा खंडेलवाल ने गुरुवार को महिला चिकित्सालय में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया और शुक्रवार सुबह बीएड की परीक्षा देने राजस्थान कॉलेज जा पहुंचीं।
कॉलेज प्रशासन ने उन्हें अलग कमरा मुहैया कराया, जिसमें पहले एक घंटे कुर्सी पर बैठकर और बाद में लेटकर परीक्षा दी। रेखा की भावनाओं को समझते हुए उनके मेडिकल व्यवसायी पति अशोक गुप्ता ने पहल की। अशोक कहते हैं, जब कभी मैं घबरा जाता हूं, रेखा ही हिम्मत बंधाती है। परीक्षा के लिए गई रेखा ने एक हाथ में कलम थी तो दूसरे में जच्च की परंपरा के तहत चाकू था।
निशा लाई रोशनी
दुर्गापुरा की निशा शर्मा ने गुरुवार देर रात एक बजे बेटी को जन्म दिया और सुबह सात बजे वे महाराजा कॉलेज के एक अलग कमरे में बीएड की परीक्षा दे रही थीं। यह सब संभव हुआ निशा के जज्बे, उनके पति की पहल और अस्पताल व कॉलेज प्रशासन के सहयोग से।
निशा (24) ने जनाना अस्पताल में सामान्य प्रसव से बच्ची को जन्म दिया जिससे उसे कुछ उम्मीद बंधी कि वे अपनी रीक्षा दे पाएंगी। उनके पति उमाशंकर पांडे ने उन्हें हौसला बंधाया और परीक्षा की व्यवस्था करने का भरोसा भी दिलाया।
हाईकोर्ट एडवोकेट पांडे ने पहले अस्पताल प्रशासन से और फिर महाराजा कॉलेज प्रशासन से बात की। दोनों ओर से उन्हें सकारात्मक जवाब मिला और वे सुबह सात बजे निशा को लेकर कॉलेज पहुंच गए। उन्हें अलग कमरे में परीक्षा देने की अनुमति भी मिल गई। निशा ने कहा कि अच्छा रहा, मेरा साल खराब नहीं हुआ। परीक्षा के दौरान निशा की बेटी अस्पताल में दादी के पास रहीं।