जयपुर.
पत्रकारिता के दायरे में भास्कर द्वारा की गई समानांतर जांच के तहत संवाददाता और पहुंचे उन दुकानों पर जहां से आतंकियों ने साइकिलें खरीदी थी। संवाददाता अपने साथ पूरा अखबार भी लेकर गए थे जिसमें संदिग्धों के स्केच छपे थे। व्यापारियों से पूछा गया कि बताइए इनमें से कौन आया था आपके पास। उन्होंने बताई हकीकत..
शहर में मंगलवार शाम हुए सीरियल बम ब्लास्ट से पहले आतंकवादी किशनपोल बाजार में दिनदहाड़े थैलों में बम लेकर करीब डेढ़ घंटे घूमते रहे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। वे बम लेकर ही साइकिल की दुकानों पर गए और गलत नाम-पते से साइकिलें खरीदीं। इसके बाद बेखौफ होकर अपने नापाक इरादों को अंजाम दिया। भास्कर संवाददाता राजेन्द्र गौतम व विनोद मित्तल शुक्रवार को कफ्र्यू हटने के बाद किशनपोल बाजार पहुंचे। उन्होंने जब दुकानदारों से इस संबंध में बातचीत की तो कई सनसनीखेज जानकारियां सामने आई।
आतंकवादियों ने दुकानों से साइकिलें खरीदने से पहले पूरी तरह से किशनपोल बाजार का मुआयना किया था। आतंकियों ने दुकानों की दूरी का ही ध्यान नहीं रखा, बल्कि उन्होंने अपनी भाषा भी कई जगहों पर बदली। किसी दुकान पर वे हिंदी में बात कर रहे थे तो दूसरी दुकान पर उन्होंने पूरी तरह से बंगाली भाषा का इस्तेमाल किया। यहां तक कि दुकानों पर साइकिलें खरीदने के लिए भी केवल एक ही व्यक्ति गया। शेष दुकान से दूर खड़े रहे।
दुकानों के बीच दूरी का भी ध्यान रखा
आतंकवादियों ने साइकिल खरीदने से पहले दुकानों की दूरी का विशेष ध्यान रखा। इन सातों दुकानों के बीच में करीब 10 से 15 दुकानों की दूरी है। यही नहीं, तीन दुकानें सड़क की एक तरफ हैं तो चार दूसरी तरफ। किशनपोल बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष विष्णु ओझा ने कहा कि साइकिल खरीदते समय आतंकियों ने सभी जगह गलत नाम-पते लिखवाए। इस संबंध में पुलिस ने भी सारी जानकारी ली है। साइकिल विक्रेताओं के सहयोग से ही पुलिस ने आतंकियों के स्कैच जारी किए। पुलिस भविष्य में जो भी मदद मांगेगी, व्यापारी देने को तैयार हैं।
साइकिल पर लगवाई टोकरी
नंद साइकिल कंपनी पर आतंकवादी ने साइकिल खरीदने से पहले उस पर एक टोकरी भी लगवाई। दुकान पर मिले नंदलाल ने बताया कि उस दिन उसका छोटा भाई लक्ष्मण दुकान पर बैठा था। जो स्कैच जारी हुए हैं उनसे मिलता-जुलता एक व्यक्ति दुकान पर आया था। लक्ष्मण के पास उसने सामान रखने की बात कहते हुए एक टोकरी लगवाई थी। इसका इंद्राज बिल में भी है। उस व्यक्ति ने स्टेशन रोड निवासी राजहंस के नाम से साइकिल खरीदी। बिल बुक में उसने जो पता लिखवाया, वह जांच में गलत निकला।
भयभीत भी दिखे दुकानदार
कई दुकानदार ऐसे भी हैं, जो आतंकवादियों से भयभीत हैं और सामने नहीं आना चाहते। वे यह तो मानते हैं कि साइकिल उनके यहां से खरीदी गई, लेकिन कुछ भी पूछने पर कह देते हैं कि सारी जानकारी पुलिस को दे दी है। कृष्णा साइकिल स्टोर पर बैठे किशन जैनानी ने बताया कि घटना वाले दिन वे तो दुकान पर नहीं थे, लेकिन उस दिन सीताराम ने एक साइकिल बेची थी। खरीदार के हाथ में एक ैथैला था और उसने साइकिल की रेट के लिए कुछ भी सौदेबाजी नहीं की। साइकिल विक्रेताओं का कहना है कि वे सारी जानकारी पुलिस को दे चुके हैं।
अब मोबाइल नंबर तक लिख रहें हैं दुकानदार
विस्फोट में साइकिलों का उपयोग होने के बाद साइकिल विक्रेता अब बिल पर नाम-पते के अलावा खरीदार के मोबाइल नंबर तक भी लिख रहे हैं। भास्कर संवाददाता जब एक दुकान पर गया तो वहां साइकिल खरीदने वाले एक ग्राहक का मोबाइल नंबर लिखा जा रहा था।
संतोष ट्रेडिंग से इसने खरीदी साइकिल
किशनपोल बाजार स्थित संतोष ट्रेडिंग कंपनी के सत्यनारायण मालपानी ने बताया कि जीन्स व शर्ट पहने दोपहर 2 से 2:30 के बीच एक व्यक्ति दुकान पर आया था। उसके हाथ में वैसा ही थैला था, जैसा विस्फोट में इस्तेमाल किया गया। आते ही उसने साइकिलों की रेट पूछी। करीब 10 मिनट वह दुकान के बाहर ही खड़ा रहा। साइकिल तैयार होते ही वह उसे लेकर चला गया।
साइकिल हाट पर ये आतंकी गया था
साइकिल हाट नामक दुकान पर काम करने वाले मोहम्मद आसिफ ने बताया कि उस दिन दोपहर में करीब 1 से 2 के बीच बंगाली सा लगने वाला व्यक्ति आया था। उसके हाथ में एक थैला था। उसने 2150 में एक साइकिल पसंद की और ले गया। दुकान की बिल बुक में उसने स्टेशन रोड निवासी रामसिंह नाम दर्ज कराया। वह हिंदी में बात करते हुए कभी-कभी बंगाली भी बोल रहा था।