जोधपुर. जमीन विवादों में घिरे पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री प्रतापसिंह सिंघवी ने बाड़मेर में अपने एक परिचित प्रकाशचन्द्र सिंघवी को करोड़ों रुपए की जमीन देने के लिए बाड़मेर नगर पालिका के खिलाफ गुपचुप अपना फैसला सुना दिया। यही नहीं मंत्री ने इस मामले की डेढ़ साल तक फाइल भी दबाए रखी। जबकि हाईकोर्ट सिंघवी के खिलाफ फैसला सुना चुका था। इस बारे में पता चलने पर अब पालिका ने पूर्व मंत्री के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करने पर राज्य सरकार व मंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
पालिका को भनक तक नहीं लगी
तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री प्रतापसिंह सिंघवी के इस फैसले की भनक बाड़मेर पालिका को डेढ़ साल तक नहीं लगी। जनवरी 2008 में डाक विभाग ने फिर निर्माण कार्य शुरू किया तो प्रकाशचंद्र सिंघवी मंत्री के फैसले के आधार पर स्टे के लिए कोर्ट में चले गए। इस बारे में जब बाड़मेर कलेक्टर कृष्ण कुणाल को पता लगा तो उन्होंने स्वायत शासन विभाग से इस फैसले के बारे में जानकारी हासिल की।
15 फरवरी 2008 को इस फैसले के खिलाफ बाड़मेर पालिका बोर्ड की बैठक में मंत्री के फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रस्ताव रखा गया। सर्वसम्मति से अपील का प्रस्ताव मंजूर होने पर बाड़मेर कलेक्टर कृष्ण कुणाल के निर्देश पर पालिका ने इस मामले में हाईकोर्ट में अपील दायर की। इस मामले में हाईकोर्ट ने मंत्री व सरकार को नोटिस जारी कर दिए।
आखिर जमीन किसकी
रियासत काल में यह जमीन जोधपुर राजघराने ने रेलवे को पटरियां बिछाने के लिए आबंटित की थी। 1980 में तत्कालीन कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद रेलवे ने यह जमीन नगरपालिका को सौंप दी थी। इसके एवज में पालिका ने रेलवे को जमीन का भुगतान भी कर दिया था।
क्या है मामला
बाड़मेर स्थित लक्ष्मी टाकीज के पास दो हिस्सों में बंटी करीब 36 हजार वर्ग फीट जमीन पहले रेलवे के कब्जे में थी। 6 मार्च 1980 को रेलवे ने यह जमीन नगर पालिका को सौंप दी थी। उसमें से कुछ जमीन पालिका ने डाक विभाग को आबंटित कर दी। 1985 में डाक विभाग ने निर्माण कार्य शुरू किया तो पालिका की इस कीमती जमीन पर बाड़मेर निवासी प्रकाशचंद्र सिंघवी ने अपना अधिकार जताते हुए बरसों पुराना पट्टा पेश किया।
पालिका अधिकारियों ने पट्टे की वैधता को खारिज कर दिया तो उसने कोर्ट की शरण ली। लंबे समय तक पालिका व सिंघवी के बीच कोर्ट में मामला लंबित रहा। आखिर 13 जनवरी 98 को हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट को जमीन का टाइटल तय करने की निर्देश दिए।
वर्ष 2000 में सिंघवी ने समझौता करने के लिए पालिका की सेटलमेंट कमेटी और राज्य स्तरीय कमेटी के समक्ष आवेदन किया। इसी दौरान सत्ता बदली और कमेटी भंग हो गई। इस पर सिंघवी ने 2005 में पालिका अधिनियम की धारा 300 के तहत तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री प्रतापसिंह सिंघवी के समक्ष अपील की। इस मामले में 14 जुलाई 2006 को सिंघवी ने कोर्ट के आदेश व नियम दरकिनार कर बाड़मेर नगर पालिका के खिलाफ फैसला सुनाते हुए प्रकाशचन्द्र सिंघवी को जमीन दे दी।
पालिका की जमीन के मामले में पूर्व मंत्री प्रतापसिंह सिंघवी ने पालिका के खिलाफ फैसला सुना दिया था। बोर्ड में इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का प्रस्ताव पारित होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की है।
—कृष्ण कुणाल, कलेक्टर, बाड़मेर
रेलवे की लौटाई जमीन पर प्रकाशचंद्र के हक जताने पर बरसों तक कोर्ट में मामला चलता रहा और आखिर में उन्होंने पूर्व मंत्री प्रतापसिंह सिंघवी के समक्ष अपील की तो उन्होंने पालिका के खिलाफ और प्रकाशचंद्र के हक में फैसला दे दिया था। उस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई है।
—राजेंद्र चौधरी, अधिशासी अधिकारी, बाड़मेर नगर पालिका।