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सिंचित क्षेत्र विकास के साढ़े 12 करोड़ लैप्स

अजमेर. कार्यालय और तकनीकी कारणों की वजह से सरकार द्वारा पिछले वर्ष बीसलपुर सिंचित क्षेत्र विकास के लिए आवंटित 12 करोड़ 58 लाख रुपए की राशि लैप्स हो गई। सरकार ने चार खंड खोलने का फैसला किया था, लेकिन एक ही खंड खुल पाया।

तत्कालीन संभागीय आयुक्त एवं बीसलपुर सिंचित क्षेत्र विकास के आयुक्त दीपक उप्रेती ने वर्ष 2007 में सिंचित विकास एंव जल उपयोगिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिख कर चार खंड खोलने का आग्रह किया था। विभाग ने उप्रेती के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। विभाग ने चारों खंडों के लिए भौतिक लक्ष्य 14 हजार 800 हैक्टेयर्स रखा था।

सरकार ने इसके लिए 15 करोड़ 51 लाख का प्रावधान किया था। प्रत्येक खंड को करीब 3 करोड़ 14 लाख रुपए खर्च करना था, लेकिन पिछले वर्ष बीसलपुर में केवल एक वृत और एक खण्डीय कार्यालय खुल पाया। तीन कार्यालय नहीं खुलने की वजह से 11100 हैक्टर्स और 9 करोड़ 44 लाख रुपए की राशि का तो उपयोग ही नहीं हो पाया। इधर एक कार्यालय ने छोटी-छोटी नहरें बनाने के लिए निविदा जारी कर दी थी, लेकिन तकनीकी कारणों की वजह से कार्य शुरू नहीं हो पाए। इसकी वजह से कार्यालय 3 करोड़ 14 लाख रुपए की राशि खर्च नहीं कर पाया।

क्या थी तकनीकी कठिनाई
बीसलपुर सिंचित क्षेत्र वर्षा के मौसम में चिकनी मिट्टी होने के कारण कार्यस्थल का संपर्क कट गया था। इस वजह से कार्य शुरू नहीं हो पाया। उसके बाद अक्टूबर 2007 से जनवरी 2008 तक बीसलपुर की नहरों में पानी का रेगुलेशन जारी रहा। इसकी वजह से काम नहीं हो पाया। इसके बाद काश्तकारों ने बुवाई होने की वजह से अधिकारियों को काम नहीं करने दिया।

33 खाला निर्माण के लिए निविदा
वृत कार्यालय ने तीन करोड़ आठ लाख रुपए खर्च करने के लिए 33 वाटर्स खाला निर्माण करने के लिए कार्य आदेश जारी कर दिए थे। इसके अलावा चक समितियां भी बना दी थीं, लेकिन तकनीकी कारणों की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया। नए वित्तीय वर्ष के लिए अभी सरकार ने बजट आवंटित नहीं किया है। वैसे वृत कार्यालय ने चालू वित्तीय वर्ष के भौतिक लक्ष्य 7400 हैक्टर्स और वित्तीय लक्ष्य 8 करोड़ 17 लाख रुपए का रखा है।

तकनीकी कारणों की वजह से मौके पर काम शुरू नहीं हो पाए। इस वजह से राशि का उपयोग नहीं हो पाया।
- सी आर मीणा, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त

बरसात के मौसम में बीसलपुर क्षेत्र में चिकनी मिट्टी होने की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया। बाद में किसानों ने बुआई कर दी। इस वजह से काम नहीं हो पाया। चार खंड की जगह अभी तक एक ही खंड खुल पाया है।
-जी के शर्मा, अधीक्षण अभियंता, बीसलपुर सीएडी वृत





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