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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
आतंकी और नक्सली वारदातों के मद्देनजर जिले में रेड अलर्ट घोषित है, अर्थात खतरे की घंटी। पुलिस अधिकारियों की भाषा में रेड अलर्ट का अर्थ संभावित खतरे से आगाह करना, सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त ध्यान देना और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा और पुख्ता करना होता है, लेकिन यहां हालात एकदम विपरीत हैं। ‘दैनिक भास्कर’ ने आज प्रमुख दफ्तरों व संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तो हालात चिंताजनक दिखाई दिए।
भास्कर टीम के सदस्य सभी संस्थानों में माउजर पिस्तौल (जिसे हाथ में लेकर, ध्यान से देखे बगैर नकली कहना संभव नहीं है) लिए बेधड़क घूमते रहे, अफसरों के वेटिंग रूम में बैठे रहे, लेकिन उन्हें किसी ने टोका तक नहीं जबकि सभी अफसर अपने दफ्तरों में मौजूद थे। जिले का कामकाज और ‘ला एंड आर्डर’ की कमान संभालने वाले दफ्तरों, अफसरों, संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में जैसी लापरवाही बरती जा रही है वह चौंकाने वाली है। कुछ प्रमुख स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था का हाल..।
हर दफ्तरों में सुरक्षा खामियां
जिले के महत्वपूर्ण कार्यालयों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। पुलिस कंट्रोल रूम ट्रेजरी, निर्वाचन कार्यालय, जिला पंचायत, 25 कार्यालयों वाली कंपोजिट बिल्डिंग, तहसील में हथियार सहित कहीं भी, कभी भी आया-जाया जा सकता है।
सेंट्रल जेल
राज्य की जेलों पर नक्सली हमलों और लगातार जेल ब्रेक के बावजूद प्रशासन गंभीर नहीं हुआ है। नक्सली नेता नारायण सान्याल सहित 21 नक्सली बंदियों वाली सेंट्रल जेल के गेट से मुख्य द्वार तक बिना किसी रोक-टोक के पहुंचा जा सकता है। दोपहर जेल के गेट पर कोई प्रहरी तैनात नहीं था। मुख्य द्वार के सामने दो संतरी खड़े थे। जेब में हथियार रखे संवाददाता ने जब उनसे अधीक्षक से मिलने की बात की तो उन्होंने आसानी से सहमति दे दी। इस समय जेल प्रभारी एमएल गुप्ता अंदर बैठे थे। एक संतरी अंदर चला गया और मुख्य द्वार पर एक मात्र सिपाही ही रह गया। पूरे परिसर में कोई सिपाही मौजूद नहीं था।
कलेक्टोरेट
कलेक्टर कक्ष तक बिना किसी जांच के पहुंचा जा सकता है। दोपहर करीब 2 बजे कलेक्टर सुबोध सिंह अपने कक्ष में थे। सामने एक मात्र निहत्था सिपाही था। भास्कर टीम यहां परिसर में घूमने के बाद कलेक्टर कक्ष से एकदम लगे वेटिंग रूम में पहुंची। कलेक्टर से मिलने की अनुमति के लिए बताया गया, कि सिर्फ पर्ची पर नाम लिखकर देना होगा और फिर बिना किसी जांच के भीतर जा सकते हैं। परिसर स्थित कोषालय, खनिज, खाद्य व नेशनल इन्फर्मेशन सेंटर तक भी टीम के सदस्य बिना किसी रुकावट पिस्तौल लेकर पहुंच गए।
पुलिस लाइन
जिले के शस्त्रागार और गोला-बारूद का भंडारण किए जाने वाली पुलिस लाइन में मुख्य द्वार पर बेरियर लगाया है और परिसर में गार्ड भी तैनात रहते हैं, लेकिन वे उतने चौकस नहीं रहते। भास्कर संवाददाता बिना किसी रोक-टोक मय हथियार लाइन के अंदर पहुंच गए। वहां चारों तरफ कमांडो, पुलिस कर्मी थे, लेकिन किसी ने भी कोई पूछताछ नहीं की। मुख्य आफिस के सामने 15-20 मिनट तक रुकने के बावजूद भी किसी ने कोई सवाल नहीं पूछा। इस दौरान वहां से बाहरी लोगों का आना-जाना सतत जारी था।
आईजी आफिस
सबसे ज्यादा सिपाही आईजी आफिस की सुरक्षा के लिए तैनात थे। वहां जाने पर एक सिपाही ने किससे मिलना है का सवाल भी किया, लेकिन इसके बाद उसने कोई पूछताछ नहीं की। आईजी साहब दफ्तर में थे, इसके बावजूद टीम के सदस्य हथियार लिए वेटिंग रूम में करीब 15-20 मिनट तक रुके रहे, इसके बाद बिना किसी रोक-टोक वापस लौट गए।
टाउनहाल: टाउनहाल में सुरक्षा व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। मेयर दोपहर को अपने चेंबर में नहीं थे, लेकिन वहां मौजूद किसी ने भी वहां बेधड़क घूम रही भास्कर टीम को संदेह से भी नहीं देखा।
बीएसएनएल एक्सचेंज
संचार व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बीएसएनएल कार्यालय और एक्सचेंज के चार मंजिले दफ्तर में सुरक्षाकर्मी तो दिखाई देते हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा में कोई दिलचस्पी दिखाई नहीं देती। मुख्य मार्ग पर स्थित इस दफ्तर के मेन गेट पर बिना इजाजत अंदर लिए आने पर दंड देने का बोर्ड लगाकर खानापूर्ति की गई है, लेकिन इसका कोई औचित्य नहीं है। गेट पर कोई पूछताछ नहीं होती। टीम के सदस्य मय हथियार आसानी से दूसरी मंजिल पर स्थित जीएम कार्यालय तक पहुंच गए।
एसपी आफिस
जिले की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाने वाले पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में शुक्रवार को कोई गार्ड ही मौजूद नहीं था। एसपी चेंबर के ठीक सामने बने वेटिंग रूम में करीब 15 मिनट बैठने के बाद भी किसी ने टीम से कोई पूछताछ नहीं की। इसके बाद टीम आराम से परिसर के सभी दफ्तरों में मय माउजर पिस्तौल घूम कर वापस लौट गई। इस दौरान करीब 10-12 सिपाही और 4-5 निरीक्षक दिखाई दिए, लेकिन किसी ने भी अजनबियों को नहीं रोका।