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बिना सजा 27 साल जेल में

बीकानेर.jail बॉर्डर पर छत्तरगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र में पकड़ा गया बर्मी नागरिक बिना सजा ही 27 साल तक जेल में रहा। न्यायालय के आदेश पर गुरुवार को उसकी रिहाई हुई।

बर्मा में जिला अकायाबाद निवासी मोहम्मद यूनुस को वर्ष, 1980 में छत्तरगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र में विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जेल जाने के बाद यूनुस की तबीयत बिगड़ी तो चिकित्सकों ने उसे मानसिक रोगी करार दिया। जेल प्रशासन ने वर्ष, 1987 में उसे जयपुर के मनो चिकित्सालय में भेज दिया। धारा 329 सीआरपीसी के तहत न्यायिक कार्यवाही भी रोक दी गई। विदेशी अधिनियम के तहत अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान है लेकिन यूनुस को सजा सुनाए बिना ही 27 साल तक हिरासत में रहना पड़ा।

वर्ष, 2004 में यूनुस को वापस बीकानेर कारागार में भेज दिया गया लेकिन चिकित्सकों ने उसे क्रोनिक सीजोफ्रनिया बीमारी बताते हुए लंबे इलाज की आवश्यकता जताई। यह भी कहा कि उसे पुनर्वास की आवश्यकता है और वह न्यायिक कार्यवाही समझने के लायक नहीं है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर दिए कि पागल बंदियों को जेल में नहीं रखकर मनोचिकित्सालयों में भेजा जाए।

बीकानेर कारागार अधीक्षक ए. आर. नियाजी ने बंदी की स्थिति से न्यायालय को अवगत करवाया और न्यायालय के आदेश पर फिजिशियन, मनोचिकित्सक व विधि चिकित्सक का तीन सदस्यीय बोर्ड गठित किया। इस बोर्ड ने चार अप्रैल, 08 को रिपोर्ट दी कि बंदी ठीक है और कानूनी प्रक्रियाओं को समझ सकता है।

न्यायालय ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए बंदी यूनुस को भुगती हुई सजा पर छोड़ने का आदेश दिया। उसे 100 रुपए अर्थदंड की भी सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर यूनुस को एक दिन और जेल में रखा गया। जेल प्रशासन ने गुरुवार को उसे रिहा कर विदेशी नागरिक होने के कारण जामसर थाना पुलिस को सौंप दिया।

फिर जेल जाने का खतरा
बर्मी नागरिक मोहम्मद यूनुस करीब 27 साल बाद जेल से रिहा तो हो गया लेकिन उस पर दुबारा जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है। यूनुस को विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। उसके पास न तो पासपोर्ट है और न ही वीजा। ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय के मार्फत ही उसे वापस बर्मा भेजा जा सकता है। इस प्रक्रिया में कई दिन लगेंगे। ऐसे में यूनुस के पास पासपोर्ट व वीजा नहीं होने के कारण वापस जेल जाना पड़ सकता है।

मानसिक रोगी बंदी का जब तक चिकित्सालय में इलाज चलता है, उसे नयायालय में पेश नहीं किया जा सकता। बंदी के ठीक होने पर न्यायिक कार्यवाही की जा सकती है। यही कारण है कि मोहम्मद यूनुस करीब 27 साल तक जेल में रहा।
- मुकुटबिहारी पुरोहित,डीआईजी जेल

जब तक मानसिक रोगी ठीक न हो जाए उसके खिलाफ न्यायालय में अन्वीक्षा नहीं होगी। ऐसी स्थिति में फाइल दफ्तर दाखिल कर दी जाती है जिससे बंदी के ठीक होने पर भी पता नहीं चल पाता और न्यायिक कार्यवाही नहीं हो पाती। फाइल दफ्तर दाखिल करने की बजाय कोर्ट में चलती रहनी चाहिए।
- रामकृष्णदास गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता





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