कोटा. जयपुर में हुए सीरियल धमाकों ने कोटा शहर को भी झकझोर कर रख दिया है। ऐसे में सवाल एक ही उठता है कि इस प्रकार की घटना से निबटने के लिए हमारा शहर कितना तैयार है। भास्कर ने इस बारे में विशेषज्ञों से बात की तो सभी का यही कहना था कि ऐसी घटनाओं से बचने का केवल एक ही उपाय है सतर्कता।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सघन चैकिंग होनी चाहिए जो अभी खास मौकों पर ही या कहीं आतंकी वारदात के बाद ही होती है। जरूरत पड़े तो प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की चौकसी के लिए अलग सैल बनाया जाए। आतंकवादियों ने अभी तक जितने भी विस्फोट किए वे सार्वजनिक स्थलों जैसे रेलवे स्टेशन, कोर्ट, सिनेमाहॉल, मंदिर, बाजार या ट्रेन आदि को ही निशाना बनाया।
इस लिहाज से ऐसे स्थानों पर सुरक्षा उपाय बढ़ाना जरूरी है। 15 अगस्त, 26 जनवरी, वीआईपी आगमन व अन्य त्योहारों पर पुलिस चैकिंग की सूचना पूर्व में ही प्रसारित कर दी जाती है। इसके चलते अधिकारी भी इसे सहजता से लेते हैं जबकि महत्वपूर्ण स्थानों की नियमित निगरानी के साथ अकस्मात चैकिंग भी होनी चाहिए। शहर में अभी एयरपोर्ट ही ऐसा महत्वपूर्ण स्थान है जहां सुरक्षा व्यवस्था अच्छी है। जबकि घंटाघर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल, शहर के बाजार व पौराणिक मंदिर जैसे स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई जाना जरूरी है।
सुरक्षा व्यवस्था
क्या है: 1300 पुलिसकर्मी, आरएसी द्वितीय बटालियन, इमरजेंसी रेस्क्यू टीम, स्पेशल टास्क फोर्स, सीआईडी के पास बम निरोधक दस्ता, वज्र वाहन, ए.के.47 धारी 50 कमांडो, रेलवे के पास स्निफर डॉग्स।
क्या नहीं: स्वीकृत नफरी से 200 कम, बम निष्क्रिय करने वाले प्रशिक्षित व्यक्ति की कमी, पुलिस के पास स्निफर डॉग्स नहीं।
कैसे होगी व्यवस्था: भर्ती जारी, जिससे नफरी पूरी होगी। बम निरोधक दस्ते व स्निफर डॉग्स के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं।
चिकित्सा सेवाएं
क्या है: मेडिकल कॉलेज से जुड़े दो बड़े अस्पताल, आपातकालीन यूनिट, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, सिटी स्केन, सोनोग्राफी, एक्सरे विभाग।
क्या नहीं: कैथ लैब, एमआरआई सुविधा नहीं, विशेषज्ञों के पद रिक्त, हार्ट सर्जन का पद नहीं, ट्रोमा सेंटर नहीं। नया 500 बेड का अस्पताल सालों से अधर में।
कैसे होगी व्यवस्था: नए अस्पताल का निर्माण पूरा करने की कवायद। ट्रोमा सेंटर, कैथ लैब, एमआरआई के लिए निजी अस्पतालों की सेवाएं लेनी पड़ेगी।
जनता भी करे सहयोग
शहर की सुरक्षा व्यव्स्था को लेकर और क्या बेहतर किया जा सकता है। इससे जुड़े कुछ सवालों पर ‘भास्कर’ ने एसपी विशाल बंसल से बातचीत की तो उन्होंने पुलिस की जिम्मेदारी के साथ जनता से भी जागरुक रहने की गुजारिश की।
>> ऐसी स्थिति में कैसे होगी शहर की सुरक्षा?
>> संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा स्थानीय लोगों की मदद से की जाएगी। इसके लिए शनिवार को एसएचओ व प्रमुख लोगों की एक बैठक बुलाई गई है। जिसमें उन्हें ऐसे हालातों से निबटने व ऐहतियात के उपाय बताए जाएंगे।
>> शहर में कितने स्थान ‘टार्गेट’ पर है?
>> भी तक ऐसी कोई सूची खूफिया विभाग की तरफ से प्राप्त नहीं हुई है। फिर भी प्रमुख धार्मिक स्थानों सहित शहर के 14 स्थानों पर सशस्त्र गश्त कराई जा रही है।
>> गश्त अमूमन रात के समय ही देखने को मिलती है। दिन में क्या व्यवस्था है?
>> 24 घंटे तो हर स्थान पर पुलिसकर्मी तैनात नहीं किए जा सकते हैं। इसके लिए ही स्थानीय प्रबुद्ध लोगों की मदद ली जा रही है। ताकि हर समय ऐसे स्थानों पर नजर रखी जा सके और संदिग्ध गतिविधि तत्काल पकड़ में आ सके।
>> क्या वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
>> सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम ठीक है। उसे और अधिक पुख्ता किया जा रहा है।
रोगी वाहन
क्या है: मेडिकल कालेज से जुड़े दो बड़े अस्पताल एमबीएस में 2 व जेकेलोन में 1 एंबुलेंस। दो दर्जन निजी व सामाजिक संस्थाओं की एंबुलेंस। सभी निजी बड़े अस्पतालों के पास अपनी एंबुलेंस।
क्या नहीं है: सरकारी एंबुलेंस का अभाव। तीन है जो डॉक्टरों को लाने-ले जाने में काम आती है। आधुनिक व आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित एक भी एंबुलेंस नहीं।
कैसे होगी व्यवस्था: आपात स्थिति में निजी चिकित्सालयों व संस्थाओं से मांगी जाएगी मदद।
ब्लड बैंक
क्या है: एक सरकारी व दो निजी ब्लड बैंक।
निजी बैंक में ब्लड सेपरेशन की सुविधा। 250 से अधिक सूचीबद्ध डोनर।
क्या नहीं है: सरकारी ब्लड बैंक में हमेशा रक्त का टोटा। निजी ब्लड बैंक के प्रति दानदाताओं का रुझान।
कैसे होगी व्यवस्था: आपात स्थिति में शहरवासियों में रक्तदान का जज्बा। जनता से अपील व शिविर लगाकर की जाएगी व्यवस्था।
संचार व्यवस्था
क्या है: बीएसएनएल, आर्मी के अलावा निजी क्षेत्र की 4 बड़ी कंपनियों का नेटवर्क। पुलिस, प्रशासन व निगम के पास वायरलेस सिस्टम।
क्या नहीं है: मोबाइल टावर यूनिट की कमी। सम्पर्क कटने पर तत्काल कोई व्यवस्था नहीं।
कैसी होगी व्यवस्था: टावर नष्ट होने की स्थिति में मोबाइल टावर वेन लगाई जाएगी। सेना की मदद लेंगे।
दमकल व्यवस्था
क्या है: शहर में सब्जीमंडी व श्रीनाथपुरम में दो फायर स्टेशन, 11 बड़ी व दो छोटी दमकलें।
क्या नहीं है: 4 और फायर स्टेशन की जरुरत। स्वीकृत नफरी से आधा स्टाफ। छोटी दमकलों के अलावा आधुनिक संसाधनों की कमी, हॉज पाइप लीकेज।
कैसे होगी व्यवस्था: एक फायर स्टेशन निर्माणाधीन, संसाधनों के लिए 23 करोड़ का बजट भेजा, स्वीकृति का इंतजार। ठेके पर लिया स्टाफ, स्थायी स्टाफ की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं।