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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
नियम-कानून कागजों पर बरकारर थे और साइबर कैफे में बगैर किसी वेरिफिकेशन के लोगों की एंट्री जारी थी। जयपुर बम धमाकों के बाद शहर के जिला मजिस्ट्रेट आरके राव ने साइबर कैफे मालिकों को वेरिफिकेशन के बगैर यूजर्स को एंट्री न करने देने और संदेह होने पर पुलिस को सूचित करने का फरमान तो जारी कर दिया, लेकिन महज 24 घंटे के अंदर ही इन आदेशों की अनदेखी होने लगी।
शुक्रवार को जब कुछ साइबर कैफेज़ का जायजा लिया गया, तो यही लगा कि इंटरनेट पर कोई भी फर्जीवाड़ा करना हो तो यह शहर काफी सेफ है। यहां न तो अपनी सही पहचान देने की जरूरत है और न ही किसी अन्य औपचारिकताओं की। प्राइवेसी की छूट अलग से। आप किसी भी साइबर कैफे पर जाएं गलत नाम-पता बताएं और केबिन में घुस जाएं।
सेक्टर-22, शाम 6.35 बजे
आईएसबीटी-17 के सामने सेक्टर-22 जहां 24 घंटे भीड़भाड़ रहती है। यहां के एक साइबर कैफे पर शाम करीब 6.35 पर संवाददाता ने बतौर यूजर एक साइबर कैफे में एंट्री की। साइबर कैफे के मालिक ने कहा कि अपनी एंट्री कर दो.. आईडेंटिटी प्रूफ है? नहीं है, कोई बात नहीं, 10 मिनट के लिए बैठ जाओ, 10 रुपए लगेंगे। यहां रजिस्टर तो था, लेकिन उसमें एंट्री कम ही लोगों ने की थी।
सेक्टर-37 : शाम 6.50 बजे
नेट पर बैठना है। साइबर कैफे मालिक ने कहा एंट्री कर दो और बैठ जाओ। रजिस्टर में गलत नाम-पता लिखवाया। पूछा गया, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस है? इनकार करने पर कहा, कोई बात नहीं, सिस्टम पर बैठ जाइए।
से-40 मिनी मार्केट : शाम 7.00 बजे
यहां पहुंचे तो, कैफे के कारिंदे ने न तो प्रूफ पूछा और न ही कोई एंट्री करवाई, सीधे सिस्टम पर बैठा दिया। यहां रजिस्टर पड़ा था, लेकिन उसे कोई यूज नहीं कर रहा था।
क्या एंट्री-क्या आईडी, काम करो और चलते बनो..
रवि कुमार/सुखजीवन शर्मा.
पंचकूला.
गुलाबी नगरी के बम धमाकों से लाल होने के बाद भी पंचकूला प्रशासन की नींद नहीं खुली। सुरक्षा एजेंसीयों के इन हमलों के दौरान जानकारी जुटाने के लिए साइबर कैफे के इस्तेमाल की पुष्टी होने के बाद भी पंचकूला के ज्यादातर साइबर कैफे बिना एंट्री, बिना पहचान पत्र के ही नेट सर्फिग करवा रहे हैं।
सबसे पहले शहर के बिजनेस सेंटर और भीड़-भाड़ वाले इलाके सेक्टर-11 की मेन मार्केट में पहुंचे। फस्र्ट फ्लोर पर एक साथ 3 साइबर कैफे एक साथ मौजूद थे। पहले साइबर कैफे में यूं ही एंट्री हो गई, किसी ने कूछ नहीं पूछा। कुछ देर में अटेंडेट आया और कंप्यूटर की और इशारा करते हुए बैठने को कहा। जब उससे एंट्री के बारे में पूछा, तो उसने हंसते हुए कहा कौन पूछता है, आप काम करो कोई टेंशन नहीं है।
इसी दौरान रजिस्टर खोल कर देखा तो उसमें -16/5/2008 की कोई एंट्री नहीं थी, जबकि कैफे में कुछ और लोग भी मौजूद थे। सेक्टर-11 बूथ मार्केट के हाल भी कुछ ऐसे ही थे। यहां रजिस्टर तक मौजूद नहीं था।
पूछने पर जवाब मिला, क्या एंट्री-क्या आईडी, बस काम करो और चलते बनो..किसके पास इतना वक्त है? साइबर कैफे ओनर्स की इस तरह की मनमानी के पीछे जानकारों का मानना है कि मार्केट में अब हर कोई एक कोने में दो कंप्यूटर लगा कर काम शुरू कर देता है। इन लोगों को रोकना मुश्किल है। वहीं बूथ्स में कैफे चलाने वाले ज्यादातर के पास इसके लिए लाइसेंस तक नहीं है।
क्या है नियम
साइबर कैफे चलाने के लिए साइबर नियमों के अनुसार कैफे में नेट सर्फ करने वाले की एंट्री जरूरी है। एंट्री के साथ-साथ मान्य पहचान पत्र का होना भी जरूरी है। इसके साथ ही कैफे में कम से कम 6 महीने तक की इलेक्ट्रॉनिक रिकर्ॉ्िडग का होना जरूरी है।
>> हमारी तरफ से पूरी एहतियात बरती जा रही है, लेकिन अभी तक हमने कोई भी आदेश जारी नहीं किया है। हम शहर के साइबर कैफे पर नजर रखे हुए हैं। जल्द ही हम साइबर कैफे के रिकॉर्डस की जांच करने वाले हैं।
संदीप खिरवार, एसपी पचंकूला