वेरका/अमृतसर. धीरे-धीरे पानी के पोषक तत्व कम होते जा रहे हैं, जिसके कारण अब बिना रासायनिक खादों के इस्तेमाल के कुछ भी पैदा करना मुश्किल हो गया है। आने वाले दस साल में हालात यह हो जाएंगे कि किसान दोगुना खाद डालकर भी वर्तमान के मुकाबले आधा अन्न भी पैदा नहीं कर पाएंगे और जो अन्न पैदा होगा, उसमें रासायनिक खादों की मात्रा इतनी ज्यादा होगी कि शायद वह खाने के लायक ही न रहे।
पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और सैंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार पानी के जरूरत से अधिक दोहन के कारण जहां जलस्तर गिर रहा है, वहीं पानी में मौजूद पौष्टिक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाशियम, सल्फर आदि की मात्रा में भी एक तिहाई की कमी आई है।
यही वजह है कि पहले जहां बिना खाद के अच्छी पैदावार होती थी, वहीं अब तमाम खादें डालने के बावजूद अपेक्षित फसल नहीं हो रही। वर्तमान में पंजाब में दो क्विंटल प्रति एकड़ फर्टीलाइजर इस्तेमाल हो रहा है, यह अनुपात देश में सर्वाधिक है।
रिपोर्ट तैयार करने के लिए पंजाब को तीन जोनों में बांटा गया था। पहले एग्रो क्लाइमैटिक जोन में गुरदासपुर, होशियारपुर, रोपड़ शामिल हैं। इन्हें कंडी एरिया भी कहा जाता है। दूसरे सब-माउंटेनियस जोन में अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, नंवाशहर, संगरूर शामिल हैं। 35 प्रतिशत फसल इन्हीं क्षेत्रों में होती है।
तीसरे सदरन ड्राई जोन में बठिंडा, फरीदकोट, फिरोजपुर, मानसा, फतेहगढ़ साहिब, मोगा, मुक्तसर को शामिल किया गया। पानी खारा होने के कारण ये क्षेत्र सिंचाई के लिए उपयुक्त नहीं माने गए हैं।