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गठजोड़ के नेताओं में समझौते से अफसर डरे

जालंधर. अकाली-भाजपा गठजोड़ में हुए समझौते से राज्य की अफसरशाही में घबराहट है। आईपीएस, आईएएस अफसरों को दोधारी तलवार का सामना करने का डर सता रहा है। अकाली दल के नेताओं का दबाव झेल रहे अफसरों को अब भाजपा नेताओं के दबाव का सामना करना पड़ेगा।

गठबंधन के सहयोगियों के बीच हुए समझौते के मुताबिक अब ऐसे अफसरों की खैर नहीं जो उनके नेताओं की उपेक्षा करेंगे। भाजपा के मंत्री और विधायक यह आरोप लगाते रहे हैं कि अफसरशाही उनकी बात नहीं सुनती और बड़े अफसरों के साथ-साथ जिलों और कस्बों में लगे अफसर भी उनको भाव नहीं देते।

भाजपा ने ऐसे अफसरों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है जो उसके नेताओं की परवाह नहीं करते हैं। इस सूची में आईपीएस, आईएएस अफसरों के साथ-साथ पीपीएस और पीसीएस अफसरों के नाम हैं। भाजपा सूत्रों की माने तो इस सूची में सिविल सचिवालय में मलाईदार पदों पर तैनात तीन बड़े आईएएस अफसरों के भी नाम हैं।

ये वे अफसर हैं जो भाजपा मंत्रियों की बात सुनते ही नहीं हैं। इसी तरह से इस सूची में पांच जिलों के एसएसपी और डीसी के नाम भी हैं। भाजपा विधायक भी अब यह चाहते हैं कि उनकी मर्जी से एसडीएम डीएसपी और थानों मे एसएचओ तैनात किए जाएं। विधायकों ने अब अपनी सूची बनानी शुरू कर दी है।

नेताओं के दबाव का हाल
अकाली मंत्रियों और विधायकों का सरकार सरकारी कामकाज में पहले से ही काफी हस्तक्षेप है। अब भाजपा नेताओं का दबाव भी रहेगा। एक एसएसपी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनको ऐसे दो इंस्पैक्टरों को थानों में एसएचओ लगाना पड़ा है जिनके खिलाफ कोर्ट में भ्रष्टचार के केस लंबित हैं।

इस एसएसपी ने बताया कि वे दो बार इन एसएचओ को हटा चुके हैं पर दोनों बार क्षेत्र के विधायक के दबाव उनको फिर से उसकी थाने मे लगाना पड़ा। यह हाल सभी जिलों में है। ऐसे दबाव से दुखी दो एसएसपी और एक आईजी पहले ही अपना पद छोड़ चुके हैं। इसी तरह से एक यूनिवर्सिटी के वीसी भी राजनैतिक दखल से दुखी होकर त्यागपत्र दे चुके हैं।

कई अफसर डैपूटेशन पर जाने की ताक में
पंजाब में तैनात आईपीएस और आईपीएस अफसर पहले कभी डैपूटेशन पर जाने के लिए तैयार नहीं होते थे। नियमों के अनुसार 31 आईपीएस अफसर डैपूटेशन पर केन्द्र जाने चाहिए। इस साल 12 पुलिस अफसरों ने राज्य के गृह विभाग से डैपूटेशन पर भेजने का आग्रह किया है।

राज्य में बादल के सरकार आते ही 6 अफसर पहले ही डैपूटेशन पर चले गए। यही हाल आईएएस अफसरों का भी है। प्रिंसिपल सचिव के पद पर तैनात अफसर समेत 8 अफसरों ने डैपूटेशन पर भेजने का आग्रह किया है।

>> अफसरशाही को अपना व्यवहार बदलना होगा। सरकार जनता की है अफसरों की नहीं। मैं इस बारे में कई बार अफसरों को चेतावनी दे चुका हूं, अब चेतावनी नहीं कार्रवाई होगी।
प्रकाश सिंह बादल, मुख्यमंत्री

>> लोकतंत्र में अफसरों का काम सरकार के फैसलों को लागू करना है न कि सिस्टम पर हावी होने का प्रयास करना। जो अफसर नहीं सुधरेगा उसको इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।
मनोरंजन कालिया, स्थानीय निकाय मंत्री





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