Astrology
Astro Speak Astro Speak सामुद्रिक विज्ञान.
यदि कोई व्यक्ति मोटा है तो इसका अभिप्राय यह नहीं कि वह बलवान ही होगा। ठीक इसी प्रकार किसी भी दुबले व्यक्ति को देखकर यह समझ बैठना भी बड़ी भूल ही कही जाएगी कि वह कमजोर होगा।
लंबे कद वाले तथा नाटे कद वाले व्यक्तियों के संदर्भो में यदि ऐसा निर्णय किया जाता है तो वह भी गलत साबित हो सकता है। आयुर्वेद में मनुष्य के बल की परीक्षा तथा अन्यान्य भावों के संदर्भो में कुछ विशिष्ट बातें सूक्ष्म रूप में बताई गई हैं। पुरुष के शरीर की सप्त-धातुओं में से जो धातु ‘पुष्ट’ हो उसे ‘सार’ कहते हैं।
आयुर्वेद महर्षि अग्निवेश ने शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों पर आधारित आठ प्रकार की सार-परीक्षाएं बताई है, जिनके माध्यम से किसी भी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक पहलुओं को जाना जा सकता है
त्वचा सार पुरुष
ऐसी व्यक्ति की त्वचा चिकनी, मुलायम, देखने में साफ-सुथरी, गंभीर, रेशमी रोमों से युक्त तथा कांतिमान होती है। जिस व्यक्ति में ऐसी त्वचा सारता पाई जाती है वह सुखी एवं सौभाग्यशाली होता है। बुद्धि, विद्या एवं स्वास्थ्य से संपन्न होता है। उसकी आयु लंबी होती है।
रक्त सार पुरुष
ऐसे व्यक्ति के कान, आंख, मुख, जीभ, नासिका, ओंठ, हाथ तथा पैरों के तलवे, नाखून, ललाट, मूत्रेंद्रिय चिकने तथा लाल-वर्ण वाले, शोभावान तथा चमकदार होते हैं। इस प्रकार की रक्त सारता वाले का होना सुख, अच्छा स्वभाव, मेधा सुकुमारता का परिचायक माना गया है। उल्लेखनीय है कि ऐसे व्यक्तियों में शक्ति कम होती है तथा वे गर्मी व कष्ट सहन नहीं कर पाते हैं।
मांस सार पुरुष
ऐसे व्यक्ति के ललाट, गर्दन के पीछे का हिस्सा, नेत्र, गाल, ठोड़ी, गरदन, कंधा, पेट, कांख, छाती, हाथ, पैर खूब मांस से भरे होते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्ति सुंदर दिखाई देते हैं। ऐसी मांस सारता वाले व्यक्ति क्षमावान, धैर्यवान तथा स्थिर मनोवृत्ति वाले होते हैं। इनके स्वभाव में सरलता होती है। ये स्वस्थ, सबल एवं सुखी होते हैं। इनकी आयु लंबी होती है। विद्या और धन से भरपूर होते हैं।
मेद सार पुरुष
जिन व्यक्तियों में मेद धातु अधिक होती है, उनके वर्ण, स्वर, नेत्र, केश, लोम, नख, दांत, ओंठ में अन्य प्रकार के पुरुषों की अपेक्षा अधिक स्निग्धता पाई जाती है। ऐसे व्यक्ति कष्ट सहने में असमर्थ होते हैं। इनके पास खूब धन-दौलत होती है। ये असाधारण रूप से दानी होते हैं। स्वभाव में सरलता होती है। ये सुख एवं ऐश्वर्यो का भोग करते हैं।
अस्थि सार पुरुष
इनके शरीर में अस्थि धातु (हड्डी) बेहद पुष्ट होती है। इनके दांत, नाखून, अन्यान्य पुरुषों की अपेक्षा मोटे होते हैं। इनकी ऐड़ी, घुटना, टखना, कॉलर, बोन, ठोड़ी, सिर तथा गाठें स्थूल होते हैं। अस्थि सार पुरुष बेहद उत्साह वाले होते हैं। खूब परिश्रमी होते हैं। इनमें गजब की कष्ट सहने की शक्ति होती है। शरीर सुपुष्ट होता है तथा ये लंबी उम्र प्राप्त करते हैं।
मगा सार पुरुष
ऐसे व्यक्तियों के अंग सुकुमार होते हैं। ये बलशाली होते हैं। इनका वर्ण स्निग्धता लिए हुए होता है, इनकी आवाज भी सुरीली एवं गंभीर होती है। इनकी अस्थि-संधियां मोटी, लंबी तथा गोल होती है। ये शास्त्र ज्ञान के माहिर होते हैं। विज्ञान के ज्ञाता होते हैं। इनको पुत्र-संतानें प्राप्त होती हैं। ये समाज में आदरणीय होते हैं। अपार धन-संपत्ति के मालिक होते हैं। लंबी उम्र प्राप्त करते हैं।
शुक्र सार पुरुष
जिन व्यक्तियों के शरीर में वीर्य (शुक्र) की अधिकता होती है वे बेहद सौम्य स्वभाव वाले होते हैं। इनकी नजरों में भी मधुरता के भाव प्रदर्शित होते हैं। ऐसे व्यक्ति सदा-प्रसन्न रहते हैं। इनकी आंखों में सात्विकता के भाव देखे जा सकते हैं। आंखें ऐसी प्रतीत होती है मानो उनमें दूध भरा हुआ हो। इनके दांत चिकने, सुडोल तथा नुकीले होते हैं। इनके वर्ण तथा स्वर में प्रभाव पैदा करने की विलक्षण क्षमता होती है। ये कांतिमान होते हैं। ऐसे पुरुष महिलाओं को परमप्रिय होते हैं। बेहद कामी तथा बलवान होते हैं। ये अपने जीवन में धन-संपत्ति एवं ऐश्वर्यो को भोगते हैं।
सत्व सार पुरुष
‘सत्व’ मन को कहते हैं। ऐसे मनस्वी लोगों की याददाश्त बहुत तेज होती हे। ये देव, ब्राrाण, माता-पिता-गुरु आदि की खूब सेवा करते हैं। ये कृतज्ञ होते हैं। इनके आचार-विचारों में पवित्रता होती है। बेहद उत्साही तथा दक्ष होते हैं। धीर एवं गंभीर होते हैं। पराक्रमी होते हैं। इनकी बुद्धि में भी गंभीरता पाई जाती है। इनके कार्य भी गंभीरता लिए हुए होते हैं। ये कल्याणकारी मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
सर्वविध सारयुक्त पुरुष
इनमें सभी धातु सारों की थोड़ी-थोड़ी उपस्थिति होती है। ऐसे सभी सारों से संपन्न पुरुष अत्यंत बलशाली होते हैं। इनमें कष्टों को सहने की क्षमता होती है। इनमें गजब का आत्मविश्वास पाया जाता है। ये लोग दूसरों की भलाई करने हेतु हमेशा तत्पर रहते हैं। इनका शरीर सुगठित होता है। ये प्रत्येक कदम सावधानी से बढ़ाते हैं। ये लंबे समय तक जवान बने रहते हैं। प्राय: बीमार नहीं होते हैं। इनकी संतानें भी इन्हीं सद्गुणों से युक्त एवं दीर्घायु होती हैं। इनका जीवन सुख समृद्धियों से सराबोर होता है। इनका स्वर प्रतिध्वनि युक्त, स्निग्ध (प्रिय), गंभीर तथा महान होता है। लेखक शिमला में प्राध्यापक हैं