मुंबई.
शिवसेना के कार्यवाहक अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की तुलना भारतीय बाजार में बिकने वाले उन चीनी सामानों से की है, जो दिखने में तो आकर्षक लगते हैं, लेकिन टिकाऊ नहीं होते। उन्होंने आगामी चुनाव में शिवसेना को एमएनएस से किसी भी तरह के खतरे को नकारते हुए कहा कि शिवसैनिक 'असली' और 'नकली' की पहचान करना जानते हैं।
डीएनए/भास्कर से चर्चा में ठाकरे ने अपनी पार्टी पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा, 'शिवसेना में टूट का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। हमने 2007 के मुंबई नगर निगम चुनाव में खुद को साबित किया है और 2009 के विधानसभा चुनाव में भी अपना लोहा मनवाएंगे।' यह पूछे जाने पर कि चुनाव के बाद क्या शिवसेना रूठे राज ठाकरे के लिए पार्टी के दरवाजे खोलेगी, उद्धव ने कहा, 'शिवसेना कोई धर्मशाला नहीं है कि जब चाहे कोई अपनी मर्जी से आए और चला जाए।'
वड़ापाव और मुंबई को लेकर हो रही राजनीति पर उद्धव ने कहा, 'चाहे मुंबई हो, या फिर देशभर में किसानों की दशा का मामला, आखिरकार ये मुद्दे मराठी माणुस से ही तो जुड़े हैं।'
वड़ापाव में शर्म कैसी? उन्होंने आश्चर्य जताया कि वड़ापाव को मैक्डोनाल्ड के मुकाबले वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उनके मिशन के पीछे छिपे आर्थिक दृष्टिकोण को प्रतिद्वंद्वी राजनेता क्यों नहीं देख सके। उद्धव ने कहा, 'जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो हर दिन भोजनावकाश के दौरान वड़ापाव खाने के लिए दादर तक दौड़कर जाता था। मेरा छोटा बेटा भी वड़ापाव का शौकीन है'। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को बर्गर खाने में गर्व महसूस होता है तो फिर उसे वड़ापाव खाने में शर्म क्यों महसूस होती है।