चेतन की नजर में युवा भारतभारत का युवा अब ‘रिस्क’ लेने से नहीं घबराता और हर वो काम करना चाहता है जिसमें ‘रिस्क’ अधिक हो और फायदा भी। ये कहना है भारत के युवा वर्ग से जुड़े मसलों पर रोचक पुस्तकें लिखने वाले जाने-माने लेखक चेतन भगत का। चेतन की नई पुस्तक ‘थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ अब बाजार में गई है और ये पुस्तक छोटे शहरों के युवाओं को केंद्रित कर लिखी गई है।
चेतन की नई पुस्तक ‘फाइव प्वाइंट समवन’ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी के छात्रों के बारे में और दूसरी पुस्तक ‘वन नाइट ञ्च कॉल सेंटर’ भारत में बढ़ते कॉल सेंटरों पर केंद्रित है। ये दोनों पुस्तकें भारत में और दूसरे देशों में इतनी बिकी हैं कि अमरीका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने चेतन भगत को ‘भारतीय इतिहास में सबसे अधिक बिकने वाला अंग्रेजी उपन्यास करार दिया है।
अपनी नई पुस्तक ‘थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ के बारे में चेतन कहते हैं, ‘ये किताब धर्म, क्रिकेट, दोस्ती और राजनीति सब चीजों को जोड़कर लिखी गई है, ये कहानी अहमदाबाद के तीन दोस्तों की है जो क्रिकेट का सामान बेचने वाली दुकान खोलते हैं। लेकिन फिर जो होता है वो लोगों के पढ़ने के लिए है।’
गुजरात में पिछले कुछ वर्षो में दंगे हुए हैं और कुछ नए क्रिकेटर भी भारतीय टीम में शामिल हुए हैं, तो क्या असली घटनाओं से प्रेरित है चेतन की कहानी।
चेतन कहते हैं, ‘घटनाएं असली हैं लेकिन मेरे चरित्र काल्पनिक हैं क्योंकि मैंने उपन्यास लिखा है, ये कोई डॉक्युमेंट्री नहीं है। इसलिए लोगों को इसे पढ़ने में मजा आएगा।’ भारतीय युवा वर्ग के बारे में चेतन मुस्कुराते हुए कहते हैं, आज का युवा बहुत रिस्क लेता है। हमारे माता-पिता सरकार नौकरियां चाहते हैं.. कम रिस्क .. लेकिन आज का युवा डरता नहीं है। वो आगे बढ़ना चाहता है। उनके सपने अलग हैं, वो गलतियां करने से घबराते नहीं हैं।’
चेतन कहते हैं कि भारत में मौके कम हैं और करियर की शुरुआत में गलतियों को माफ नहीं किया जाता, लेकिन क्या ये सही है? ये पूछे जाने पर कि भारत का युवा वर्ग अन्य देशों से कैसे अलग है,‘वो कहते हैं कि भारत का युवा चाहे जींस पहने, बरगर खाए और अंग्रेजी बोले लेकिन वो अंदर से भारतीय होता है। वो विदेश जाता है मजबूरी में महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने लेकिन मौका मिलते ही वो वापस भी आता है।’ चेतन खुद भी हांगकांग में कई साल रहे लेकिन अब वापस भारत आ गए हैं और यहीं रहना चाहते हैं। नए युवा वर्ग पर आने वाले दबावों के बारे में वो कहते हैं कि हर पीढ़ी के सामने चुनौतियां होती हैं और ऐसा नहीं है कि युवा वर्ग बिगड़ा हुआ है।
आलोचना का जवाब
चेतन की किताबों की आलोचना भी हुई है और कई आलोचकों ने यहां तक कहा कि उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है और वो भारत को समझते नहीं हैं। इस बारे में चेतन मुस्कुराते हैं, वो कहते हैं, ‘अब मैं क्या कहूं, जैसे मुझे सलमान रूशदी पसंद हैं लेकिन हर आदमी उनकी अंग्रेजी नहीं समझ सकता।’ ‘मेरी किताबें भारत में कई दूसरे अंग्रेजी लेखकों की किताबों से अधिक बिकती हैं। हर आदमी गंभीर किताब नहीं लिखता। मैं जो लिखता हूं वो आम लोगों की बात होती है और शायद इसीलिए लोग उसे पढ़ते हैं।’
मेरे जीवन की तीन गलतियां
‘थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ यानी मेरे जीवन की तीन गलतियां, जब चेतन से पूछा कि उनके जीवन की तीन गलतियां कौन सी हैं तो उनका जवाब था, ‘गलतियां तो बहुत की हैं। पूरी किताब लिखनी पड़ जाएगी।’
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