Astrology
Astro Speak Astro Speak ज्योतिष सीखें.
बालक (जातक) के जन्म समय का वेलांतर एवं देशांतर संस्कार करने के पश्चात हमारे पास उस निर्धारित स्थान का स्थानीय समय (शुद्ध समय) ज्ञात हुआ है, इससे हमें इष्टकाल निकालना/बनाना है। सूर्योदय से जातक के शुद्ध जन्म समय तक के काल को-घटी-पल में वर्णित काल को इष्टकाल कहेंगे। इष्टकाल विभिन्न प्रकार से निकाला जाता है।
प्रथम यदि बालक का जन्म सूर्योदय से दिन के बारह बजे तक के मध्य है तो बालक के शुद्ध स्थानीय जन्म समय (वेलांतर-देशांतर संस्कार करने के पश्चात आए समय) को उस दिन के सूर्योदय से घटा देंगे तथा शेष को ढाई (२ १/२) से गुणा कर देंगे। प्राप्त फल इष्टकाल होगा। पूर्व में वर्णित स्थानीय समय उज्जैन दिनांक 01.01.2008 प्रात: 9.09 को सूर्योदय 7.10 से घटाया गया (9.09- 9.10= 01.59) प्राप्त 1.59 x 21/2(1.59+ 1.59+ 01.00) 4.58 इष्टकाल हुआ।
यदि जन्म समय दोपहर 12 बजे के पश्चात एवं सूर्यास्त के पूर्व हो तो जन्म समय एवं सूर्यास्त के अंतर को ढाई से गुणा कर दिनमान में से कम करने से प्राप्त फल को इष्टकाल कहेंगे। यदि जन्म समय सूर्यास्त के पश्चात किंतु रात्रि 12 बजे के मध्य का है तो सूर्यास्त से जन्म समय तक के समय को ढाई गुणा कर दिनमान में जोड़ देंगे। प्राप्त फल इष्टकाल होगा।
यदि जन्म का समय रात्रि 12 बजे के पश्चात किंतु सूर्योदय के पूर्व का है तो सूर्योदय एवं जन्म समय के अंतर को ढाई से गुणा कर 60 से घटा देने से प्राप्त फल को इष्टकाल कहेंगे। उपरोक्त विधियों में भ्रम उत्पन्न हो तो सर्वमान्य विधि यह भी है कि सूर्योदय से जन्म काल तक के समय को घंटा-मिनट में गणना कर ढाई से गुणा कर लेने पर प्राप्त फल इष्टकाल होगा।
ज्योतिष जिज्ञासुओं का ध्यान इस ओर आकर्षित करना जरूरी है कि मिनट एवं पल दोनों ही 60 अंक पर पूर्ण होते हैं अर्थात 80 मिनट को 1 घंटा एवं 20 मिनट। ठीक इसी प्रकार आधे घंटे या आधी घटी को 50 नहीं लिखे। उन्हें 30 (60 x 1/2) ही लिखें एवं समझें ताकि गणना कार्य में त्रुटि से बचा जा सके।