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भूकंप यानी ग्रहों का विनाशकारी योग

प्रसंगवश. earth चीन के भूकंप में नुकसान के आकड़ों से एक बार फिर दुनिया दहल गई है। भूकंप एक प्राकृतिक घटना है। इसके अनुमान के लिए आचार्य वराहमिहिर (लगभग 1500 वर्ष पूर्व) ने वृहद्संहिता में भूकंप अनुमान के लक्षण दिए हैं। वशिष्ठ संहिता में भी निर्घात, उल्का इन्द्रधनुष व ध्वज आदि के आकाश दर्शन से प्राकृतिक उत्पात के लक्षण बताए गए हैं।

शास्त्रों में दिन-रात को चार भागों में बांटकर उन्हें क्रम से वायव्य, आग्नेय, इन्द्र एवं वरुण मंडल में विभक्त किया गया है। इन मंडलों के नक्षत्र भी निर्धारित किए गए हैं। यह भी कहा गया है कि भूकंप आने से एक सप्ताह पहले संबंधित नक्षत्रों के दिन लक्षण प्रकट हो जाते हैं।

यद्यपि चीन ने 1966 में ही भूकंप के सटीक पूर्वानुमान की मुहिम छेड़ी थी। अमेरिका के भूगर्भशास्त्रियों ने 1974 में चीन का दौरा कर पाया था कि वहां दस हजार भूकंपशास्त्री प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। 17 केंद्र, 250 सीसमिक केंद्र व 5000 पर्यवेक्षण बिंदु स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह देखा कि कुछ कुओं के जलस्तर में एकाएक परिवर्तन व भूकंप के पूर्व रेडान गैस का उत्सर्जन हुआ।

पशु-पक्षियों के व्यवहार में भी परिवर्तन आया और पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र भी बदला। ऐसे अध्ययनों के आधार पर 4 जनवरी 1975 को की गई वैज्ञानिक भविष्यवाणी को सफलता मिली व भूकंप से बचाव की व्यवस्था भी की गई थी। इसके पश्चात भी ठोस आधारों के अभाव में समय रहते भूकंप की भविष्यवाणी करना मुश्किल व चुनौतीपूर्ण है, चाहे वे वैज्ञानिक हों या ज्योतिषी।

12 मई 2008 को चीन के चेंगदू स्थान पर आए भूकंप की कुंडली से संपूर्ण घटना समझी जा सकती है। लग्न में शनि, केतु से द्वि-द्वादश योग बना रहा है। चतुर्थ भाव अर्थात जनता, सुख-संपदा का स्वामी मंगल भी केतु के साथ ही 12वें स्थान पर है। मंगल-केतु का योग भी घात, गिरकर चोट व हानि का संकेत देता है। भविष्य में भी मंगल-केतु की युति व शनि से बारहवां होना शुभ योगकारक नहीं है। यह मंगल से बना योग 21 जून तक चलेगा। अत: यह समय सावधान रहने का है।

यदि पूर्व में आए भूकंपों के समय ग्रह गोचर पर दृष्टि डालें तो किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। प्रथम दृष्टया जो बात कही जा सकती है, उनका वर्णन किया जा सकता है। इस प्रकार यह देख सकते हैं कि शनि-केतु की युति, केंद्र स्थिति, षडाष्टक एवं द्वि-द्वादश योगों में भूकंप आए हैं। उपरोक्त वर्णित समय के अतिरिक्त भी शनि-केतु के ये योग बने हैं। भूकंप से जन-धन की हानि को कम करने के लिए इस विषय पर शोध आवश्यक है।





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