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अपनी-अपनी आस्था के अनुसार देव दर्शन प्रेरणास्पद और ऊर्जादायी है। मंदिर का वास्तु ही ऐसा होता है कि वहां पहुंंचने पर ध्यान एकाग्र हो जाता है और अपनी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकल आता है।
>> मंदिर में परिक्रमा को निर्धारित क्रम से ही करना चाहिए। विष्णु जी का मंदिर हो तो उसकी चार बार परिक्रमा करें और इस दौरान विष्णु मंत्र का ध्यान व उच्चरण करते जाएं। यह किसी संकल्प को पुष्ट करता है।
>> शिव जी के मंदिर की आधी परिक्रमा करें और लौट जाएं। इस दौरान शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। इससे मन में आने वाले बुरे ख्यालों, बुरे सपनों पर रोक लगती है।
>> देवी के मंदिर की परिक्रमा करनी हो तो एक परिक्रमा ही करें और नवार्ण मंत्र का ध्यान करें। इससे अपने लक्ष्य और संकल्प को निश्चित ही बल मिलता है।
>> यदि सूर्य के मंदिर की परिक्रमा करनी हो तो सात परिक्रमा पूरी करें और सूर्य मंत्र का ध्यान करें। इससे मन में आ रहे कलुषित विचारों पर अंकुश लगता है और सकारात्मक विचार भर जाते हैं।
>> अपनी कामनाओं की सिद्धि के लिए गणोश मंदिर की परिक्रमा करें। गणोश जी की तीन परिक्रमा जरूरी हैं। इसमें गणोश जी के स्वरूप व मंत्र का ध्यान करें। कोई भी कार्य सिद्ध करना हो तो पहले परिक्रमा कर आएं, तत्काल और कम प्रयास से ही सफलता मिलेगी।