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लग्न कैसे निकालें

जन्म कुंडली में सर्वाधिक महत्व लग्न का है। जब भी कोई व्यक्ति ज्योतिष या किसी जातक की चर्चा करेगा तो पहले लग्न क्या है, पूछा जाएगा। लग्न से व्यक्ति की संपूर्ण शारीरिक संरचना का ज्ञान होता है। अत: लग्न की गणना करते समय बहुत अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। पूर्व दिशा में उदित होने वाली राशि को लग्न कहते हैं अर्थात जब जातक का जन्म हुआ उस समय में पूर्व दिशा में जो राशि होती है उसे ही लग्न कहेंगे।

जन्म समय को स्थानीय समय में परिवर्तन कर उसे घटी-पल में परिवर्तन कर इष्टकाल बनाने के पश्चात हम लग्न निकाल सकते हैं। पंचांग में प्रात: सूर्य स्पष्ट (प्रा.सू.स्प) दिया रहता है। जिस दिनांक का जन्म हो, उस दिनांक का प्रात: सूर्य स्पष्ट पंचांग में देख लें। गत अंक में इष्ट दिनांक 01.01.२क्क्८ का (उज्जैन) प्रात: सूर्य स्पष्ट 8:16:2:44 (राशि: अंश: कला: विकला) है। यहां हम केवल 8 राशि एवं 16 कला को ही लेंगे तथा पंचांग में 8 राशि एवं 16 कला का मान देखेंगे जो कि लग्न सारिणी में दिया गया है।

8-16 का मान 48:39:12 आया इसमें इष्टकाल को जोड़ दिया 48:39:१२ + इष्टकाल 4:५८:क्क् (गत अंक से) = 53:३७:१२ आया। यदि जोड़ 60 से अधिक हो तो 60 से कम कर लें। इसे पुन: लग्न सारिणी में देखा तो इसके निकटतम अंक मिले 53:३६:३६ जिसके बायीं ओर देखने में मकर राशि तथा ऊपर अंश के कॉलम में देखने पर 17 मिले। अत: लग्न स्पष्ट हुआ 9:१७:५३:३६ मकर राशि १७ अंश ५३ कला एवं 36 विकला। यहां जिज्ञासुओं को ध्यान देने योग्य बात यह है कि पंचांग में किसी भी ग्रह की स्थिति का उल्लेख रहता है।

उसे ऐसे समझेंगे जैसे दिनांक 01.01.क्८ को सूर्य ८:१६:२:४४ था अर्थात सूर्य वृश्चिक राशि को क्रॉस कर 16 अंश एवं 2 कला एवं 44 विकला पर था। तो इसे लिखने या बोलने में धनु में सूर्य कहेंगे क्योंकि आठवीं राशि वृश्चिक है तथा नवमीं राशि धनु है। यहां सूर्य आठवीं राशि क्रॉस (पूर्ण) कर नवमीं राशि में भ्रमण कर रहा है। उपरोक्त लग्न स्पष्ट होने के पश्चात अब हम लग्न कुंडली बना सकते हैं। कुंडली में 12 खाने (कॉलम) होते हैं। यह हम खींच लें। ऊपर के मध्य कॉलम को लग्न से संबोधित करते हैं।

इस कॉलम में हम 10 अंक लिखेंगे, यह 10वीं राशि मकर को इंगित करती है। चूंकि गणना में लग्न मकर आया। जैसा कि ऊपर वर्णित किया गया है - लग्न 9:१७:५३:३६ अर्थात नवीं राशि धनु को क्रॉस कर 10वीं राशि मकर में लग्न चल रहा है। अब हम कुंडली बनाकर लग्न स्थान में 10वीं राशि लिखकर आगे बायीं तरफ बढ़ते क्रम में लिखते जाएंगे। जैसे 11, 12, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9। बारह के पश्चात पुन: एक से आरंभ करेंगे क्योंकि कुल राशि बारह ही होती है।





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आपके विचार
poonam vijay shelke
Thursday, 12th Jun 2008, 13:27
hame hamari kundali ke bareme jankari chahiye?
Laxmi Kant Raghuwanshi
Saturday, 14th Jun 2008, 11:23
How to i match my Kundli and a Girls Kundli and I want to know about Manglik Kundlies