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कौन बनेगा नेता

ग्रह प्रभाव कौन नेता हो सकता है या कौन से ग्रहयोग किस रूप में, किस स्तर का नेता बनाने में सक्षम होते हैं। आइए जानें राजयोग कारक ग्रह स्थिति को:- >> जन्मकुंडली में सबसे प्रभावशाली स्थान होता है केंद्र अर्थात लग्न, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम। उसी तरह मूल त्रिकोण, नवम, पंचम भाव। जब इन भावों के स्वामी परस्पर युति कर रहे हों जो केंद्र या त्रिकोण से भिन्न स्थानों में हों तो ऐसे जातक का साधारण राजयोग होता है। ऐसा जातक उच्च स्तरीय पद तो प्राप्त नहीं करता पर उच्च स्तरीय राजनेताओं से विशिष्ट संपर्क में रहता है। किंतु इन्हीं भावों के स्वामी उच्च राशिगत हों, उनकी युति एक-दूसरे के भावों में हों, तो ऐसा जातक उच्च स्तरीय राजनीतिज्ञ बनता है।

>> मंगल, बुध, गुरु, शुक्र एवं शनि उच्च राशिगत होकर केंद्र में आसीन हो तो प्रबल राजयोग बनता है। जातक चुनाव में भारी बहुमत प्राप्त कर लोकप्रिय होता है।

>> जिस प्रत्याशी के जन्म समय में सभी ग्रह कन्या, मीन, मिथुन, वृष, सिंह, धनु एवं कुंभ राशि में होकर केंद्र में स्थित हों वह प्रसिद्ध होता है। >> जिस प्रत्याशी के जन्म समय में बलवान शुभ ग्रह लग्न, सप्तम व दशम भाव में हों, मंगल व शनि क्रमश: नवम व एकादश भाव मे हो वह विजय प्राप्त करता है।

>> जिस जातक के लग्न में मीन राशि का शुक्र, मीन नवमांश होकर स्थित हो वह राजनेता होता है। >> जिस प्रत्याशी के लग्न में अश्विनी नक्षत्र का शुक्र स्थित हो तथा उसे सभी ग्रह देखते हों तो ऐसा जातक शत्रुहन्ता राज्याधिकारी होता है। >> लग्नेश अपनी उच्च राशि में हों तथा चंद्रमा से पूर्ण दृष्ट हों तो ऐसा जातक राज्याधिकार प्राप्त करता है। >> जिसके जन्म समय में सभी शुभ ग्रह 3, 6, 10, 11 (उपचय) स्थान में हों तथा पापग्रह लग्न एवं दशम में हों तो ऐसा जातक शत्रु संहारक राज्य अधिकारी होता है।

>> जन्म समय में तीन या अधिक ग्रह नीच राशि में होकर अपने उच्च नवांश या शुभ षष्टांश में हों तो ऐसा जातक कुशल शासक हो जाता है। >> जिसके जन्म समय में बुध, सूर्य की युति मिथुन या कन्या में हो तो ऐसा प्रत्याशी राज्याधिकारी होता है।

>> जिसके जन्म समय में सूर्य + बुध सुख भाव में, शनि + चंद्र दशम भाव में तथा मंगल लग्न में हो तो ऐसा जातक राज्याधिकार प्राप्त करता है। >> जिसके जन्म समय में सिंह का सूर्य लग्न में (शुक्र के नवमांश में नहीं हो) तथा कन्या का बुध हो वह राज्याधिकारी होता है। >> लग्नेश बली (उच्च का स्वक्षेत्री) होकर केंद्र में स्थित हो तथा मित्र ग्रहों से दृष्टि संबंध रखता हो तो राज्याधिकारी होता है। >> जिसके जन्म समय में लग्नेश अपनी उच्च राशि तथा उच्च या मित्र नवमांश का हो व केंद्र में कोई ग्रह नहीं हो तो भी वह राज्याधिकारी होता है।

>> जिसके जन्म समय में एक भी ग्रह परमोच्च राशि में स्थित हो उसे उसका अतिमित्र ग्रह देखता हो तो वह राज्याधिकारी होता है। >> जिस जातक की कुंडली में दो-तीन ग्रह उच्च राशिगत हों, चंद्रमा स्वराशि में हो, लग्न पूर्ण बली हो तो राज्य सुख की प्राप्त होती है। >>जिसके जन्म स्थान में शुक्र अपनी शत्रु राशि (4, 5) या नीच राशि (6) के अतिरिक्त अन्य राशियों में होकर द्वितीय भाव में हों, लग्नेश पूर्ण बली राज्याधिकार प्राप्त कराता है।

>> विभिन्न योगों के साथ उन ग्रहों का गोचर परिभ्रमण तात्कालिक दशा, अंतरदशा, प्रत्यंतर दशा, सूक्ष्मादिदशाओं तथा जन्म नक्षत्र से तात्कालिक ग्रहों के भ्रमण, नक्षत्र के स्वामियों का परस्पर कारक होना विशेष महत्व रखता है।

>> यदि योगकारक ग्रह 3, 6, 11 के स्वामियों से या अष्टमेश से संबंध नहीं रखते हैं तो राजयोग प्रबल होकर फलदायी होता है।

>> वैसे तो मेष से लगाकर मीन राशि तक के लग्नों में जन्मधारण करने वाले जातक विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक बन सकते हैं तथापि यदि इतिहास पर दृष्टिपात करें तो सबसे अधिक राजा, राजनेता, प्रधानमंत्री आदि उच्च स्तरीय पदों पर कर्क लग्न के जातक आते हैं। वास्तव मे कर्क लग्न की कुंडली मे केंद्र एवं त्रिकोण में अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति का निर्माण होता है जो तुला, मकर व मेष मे आए स्वक्षेत्री या उच्च ग्रहों के कारण अत्यधिक प्रभावी हो जाता है।

इसी प्रकार की स्थिति धनु लग्न के जातकों के साथ बनती हैं क्योंकि संपूर्ण केंद्र दो ग्रहो के आधिपत्य में होकर नव पंचम भाव भी सूर्य एवं मंगल में आ जाता है। ऐसे में उच्च राशि, स्वराशि या मित्र राशि के ग्रह इन भावों में आ जाते हैं तो प्रबल राजयोग बन जाता है।





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