Manoranjan
Telly Talk Telly Talk परदे के पीछे.
अमिताभ बच्चन अगर छोटे परदे पर दरबारी गायक तानसेन की तरह प्रस्तुत हुए तो सलमान खान अवाम के बैजू-बावरे की तरह हवेली की तरफ मुंह करके गा रहे हैं। शाहरुख कभी भी अपनी अप्रवासी भारतीयों को पसंद की जाने वाली श्रेष्ठि वर्ग के चहेते की छवि से आजाद नहीं हो पाए।
छोटे परदे पर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान प्रतियोगिताएं प्रस्तुत कर चुके हैं और शीघ्र ही अक्षय कुमार भी प्रस्तुत करने जा रहे हैं। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन को अभूतपूर्व सफलता मिली और करोड़ों का कर्ज चुकाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।
अत: अमिताभ बच्चन के लिए ‘जंजीर’ की तरह महत्वपूर्ण मोड़ ‘करोड़पति’ रहा। उनकी कामयाबी के रास्ते पर चलने की कोशिश में अनुपम खेर और नीना गुप्ता के प्रयास उनकी सितारा औकात के अनुरूप हाशिए पर फेंक दिए गए।
शाहरुख खान ने अमिताभ बच्चन के बड़े जूतों में पैर डालकर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ प्रस्तुत किया। वह चतुर व्यक्ति हैं और उन्होंने ढीले जूतों को पहनकर चलने की तकलीफ को अपने चेहरे पर उभरने नहीं दिया।
अमिताभ ने कार्यक्रम को एक गरिमा प्रदान की और प्रतियोगियों के साथ भावनात्मक तादात्म्य बनाया। हर एपिसोड में कविताएं पढ़ीं और आदर्श बातें कीं, जिन्हें अनपढ़ और पढ़े-लिखे दोनों ही प्रकार के लोग पसंद करते हैं। वह चौपाल पर पंडिताई पेश करते रहे और दर्शक अपने टुच्चेपन के कारण इस आदर्श से बहुत प्रभावित हुआ। मामला कुछ ऐसा था कि कस्बों के पंडितों के बीच धाराप्रवाह संस्कृत बोलने वाला प्रयाग के पंडित सा होता है।
शाहरुख खान ने अपने कार्यक्रम को अनौपचारिक बनाने की कोशिश की और युवा केंद्रित कार्यक्रम का आभास रचा। वह कुछ हद तक ही सफल हो पाए और अनुपम खेर की तरह हाशिए पर नहीं गिरे। मखौल और मजाक का अंतर शाहरुख कभी समझ नहीं पाए, इसलिए अपनी सिनेमाई विराट सफलता के बावजूद इसमें वह पुरोधा अमिताभ बच्चन के सामने उन्नीस ही नजर आए।
अब ‘दस का दम’ में सलमान खान प्रस्तुत हैं। शाहरुख खान के कार्यक्रम में प्रतियोगी को सितारे की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। सलमान खान अपने स्वाभाविक अंदाज में प्रस्तुत हैं और किसी प्रतियोगी को कमतरी का अहसास नहीं दिला रहा है। ‘पांचवीं पास’ में शाहरुख बच्चों के साथ हैं, जिसके कारण प्रतियोगी स्वयं को अपमानित समझ रहा है।
अमिताभ बच्चन की तरह शाहरुख ने आदर्श और अध्यात्म की बात नहीं की और यही कसर रह गई। सलमान खान से लोग मौज-मस्ती की अपेक्षा करते हैं और वह उनके लिए तरह-तरह से नाच-गाकर प्रस्तुत हो रहे हैं। शाहरुख और आमिर श्रेष्ठि वर्ग के प्रिय कलाकार रहे हैं, परंतु सलमान की जड़ें अवाम में बहुत गहरे तक पैठी हैं और प्रतियोगी की मदद के लिए उनकी बेकरारी स्पष्ट नजर आती है।
सलमान किसी ऊंचाई पर खड़े होकर जीवन के आदर्श की बात नहीं करते हुए अवाम के बीच उनके जैसा व्यवहार कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि मानो पुरानी दोस्ती निभाई जा रही है। अमिताभ बच्चन अगर दरबारी गायक तानसेन की तरह प्रस्तुत हुए तो सलमान खान अवाम के बैजू-बावरे की तरह हवेली की तरफ मुंह करके गा रहे हैं।
शाहरुख कभी भी अपनी अप्रवासी भारतीयों को पसंद की जाने वाली श्रेष्ठि वर्ग के चहेते की छवि से आजाद नहीं हो पाए। अमिताभ बच्चन की शेरवुडी प्रस्तुति के सामने सलमान आम जनता के मदरसे के शागिर्द की तरह स्वाभाविक नजर आ रहे हैं। इन दोनों का महत्व उनके प्रतियोगी के प्रति दोस्ताना होने के कारण है और खेल की इसी सतह पर शाहरुख मार खा गए।