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Astro Speak Astro Speak ज्योतिर्विज्ञान.
विद्यार्थी को हाईस्कूल के बाद ही यह निर्णय करना होता है कि उसे पढ़ाई की कौन सी स्ट्रीम चुननी है। मसलन गणित, कॉमर्स, बायो, कृषि, फाइन आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज आदि। उस समय वह किशोरावस्था से युवावस्था की वय:संधि पर होता है। यही वह समय होता है जब उसका व्यक्तित्व, विकास के निर्णायक मोड़ पर होता है। इसी कारण विषय के चयन का उसके भविष्य पर गहरा असर पड़ता है।
हालांकि विद्यार्थी हमेशा ठीक-ठीक यह नहीं जान पाता कि उसकी वास्तविक रुचि किस सब्जेक्ट या स्ट्रीम में है। इसकी एक प्रमुख वजह यह भी है कि कैरियर के चुनाव में बच्चे पर परिवार की इच्छा-आकांक्षा का, समाज में सम्मानित माने जाने वाले पदों का और देश की अर्थव्यवस्था के अनुसार रोजगार या अवसरों का तीन तरफा दबाव या आकर्षण होता है। ऐसे में शुरुआती इंटर के स्तर पर या हाईस्कूल के बाद वोकेशनल एजूकेशन के स्तर पर कैरियर कॉउंसिलिंग का प्रचलन बढ़ रहा है। दिक्कत यह है कि इस कॉउंसिलिंग में बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्तर पर सहज आकर्षण एवं क्षमता का पता भी नहीं लग पाता है।
ऐसे में लगभग एक दशक तक एक हजार से अधिक बच्चों की जन्मपत्रियों से पीईटी, पीएमटी के स्तर पर उनके चयन तथा उनकी पसंद एवं क्षमता का आकलन किया गया। इसके पश्चात यह निर्धारित किया गया कि जिन बच्चों की जन्मपत्री में मंगल, बुध, गुरु ग्रह प्रबल एवं निर्णायक क्षेत्र में होते हैं, उनका गणित अच्छा होता है। गणित अच्छा होने पर वे इंजीनियर, सीए, सांख्यिकी, वाणिज्य तथा भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में व्यवसाय चयन के न्यूनतम आवश्यक मापदंड को पूरा करते हैं। इन चारों में से फिर कौन सा विषय चुना जाए इसमें प्रत्येक के लिए एक या दो अतिरिक्त ग्रह भी प्रबल होने चाहिए। इसे नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है।
इंजीनियरिंग के ग्रह
मंगल, बुध तथा गुरु इन तीन में से दो ग्रहों की प्रबलता देखने के पश्चात सही ब्रांच के लिए ग्रह इस प्रकार हैं।
मैकेनिकल : मंगल
ऑटोमोबाइल : शुक्र, मंगल
इलेक्ट्रिकल : सूर्य
सिविल : शनि
इलेक्ट्रॉनिक : सूर्य, बुध
कैमिकल : गुरु
एरोनॉटिक्स : गुरु
ब्रांच की राशियां
अग्नि तत्वीय
मेष, सिंह, धनु: इलेक्ट्रॉनिक।
पृथ्वी तत्वीय
वृष, कन्या, मकर: सिविल, मैकेनिकल, ऑटो।
वायु तत्वीय
मिथुन, तुला, कुंभ: आईटी, एरोनॉटिक्स।
जल तत्वीय
कर्क, वृश्चिक, मीन: मैरीन, डेयरी, टेक्नोलॉजी, रसायन।
सीए : कॉमर्स, कंपनी सेक्रेटरी
बुध, मंगल, गुरु की प्रबलता के अतिरिक्त ग्रह।
चार्टर्ड एकॉउंटेंट : शनि
कॉमर्स : शुक्र
कंपनी सचिव : बुध
राशियां : वायु, पृथ्वी तत्वीय
एमबीए : शुक्र एवं गुरु
एमबीए की शाखाएं शुक्र तथा गुरु की प्रबलता के पश्चात।मार्केटिंग : बुध, तीसरा भावपर्सनल एडमिनिस्ट्रेशन : गुरुएचआर : शनिआईटी : बुधफाइनेंस : गुरु
अन्य ब्रांच
कानून : शनि
कानून प्रशासन : शनि, गुरु
वकालत : शनि, बुध
पत्रकारिता : बुध, गुरु
लेखन : चंद्र, बुध, गुरु
ललित कथाएं : बुध, शुक्र
बायोटेक्नोलॉजी : शनि, शुक्र, मंगल
चिकित्सक : मंगल,गुरु
अखिल भारतीय सेवाओं की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विषय चयन
राजनीति विज्ञान : सूर्य, गुरु
समाजशास्त्र : शुक्र
लोक प्रशासन : गुरु
एन्थ्रोपोलॉजी : शनि
इतिहास : शनि
मनोविज्ञान : बुध, चंद्र
भाषा : बुध, गुरु
>> ग्रह की प्रबलता षडबल से देखना होगी।>> प्रबल ग्रह का प्रभाव लग्न चंद्रमा पंचम, नवम, दशम, लाभ स्थान पर देखा जाए।>> ग्रह का आपसी संबंध, नक्षत्र में या नवांश में भी देखना होगा।
वैसे इस आलेख का उद्देश्य जनसामान्य को ज्योतिष विज्ञान की व्यवसाय चयन में उपयोगिता बताना है। अत: तकनीकी बारीकियों को यहां नहीं रखा जा रहा है। पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों में व्यवसाय के चयन के लिए ग्रह योग दिए गए हैं पर वे संक्षिप्त व सूत्रात्मक हैं। इनके आधार को और विस्तारित किए जाने की जरूरत है। बावजूद इसके इनसे बहुत कुछ सहायता प्राप्त हो सकती है।
>> लेखक जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर में ज्योतिर्विज्ञान के अतिथि प्राध्यापक हैं।