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पापा का एक दिन

बच्चों का मां से रिश्ता जहां भावनात्मक होता है, वहीं पापा से उनकी ट्यूनिंग कुछ हटकर रहती है। यहां जिक्र है कुछ ऐसे गेट्र डैड्स का जिनके बच्चे या तो उनका संबल बने हैं या फिर उनके लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं रहे हैं।

हासन का कमाल

कमल हासन और सारिका की बेटी श्रुति जल्द ही बड़े परदे पर शुरुआत करने जा रही हैं। कमल ने बेटी को अपने हिसाब से आगे बढ़ना सिखाया। इसलिए श्रुति ने पढ़ाई के बाद अमेरिका से म्यूजिक का कोर्स किया और वापस आकर चेन्नई में म्यूजिक फील्ड में दिलचस्पी ली।

श्रुति ने पापा की फिल्म ‘चाची 420’ में पहली बार बच्चे की आवाज में गाना गाया और फिर ‘हे राम’ के टाइटल सांग में कमल के साथ सुर मिलाया। श्रुति का एक एलबम इसी साल आने वाला है। अब जब बेटी बॉलीवुड में हाथ आजमाना चाहती है तो पापा पूरी शिद्दत से इसके लिए न सिर्फ कोशिश कर रहे हैं, बल्कि प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।

टीवी क्वीन और जंपिंग जैक

जीतेंद्र को फिल्म इंडस्ट्री में जमने में भले जितना वक्त लगा हो, लेकिन उससे बहुत कम वक्त बेटी एकता ने टीवी क्वीन बनने में लिया। टीवी पर जमने के लिए एकता ने महिलाओं की नब्ज पकड़कर उनको टार्गेट किया, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब रहीं। यह एकता का ही आइडिया था कि परिवार के प्रोडक्शन हाउस को आगे बढ़ाया जाए। आज दोनों मिलकर बाखूबी बालाजी टेलीफिलम्स का काम देखते हैं। जीतेंद्र के अनुसार एकता के हौसले ने ही मुझे प्रोडक्शन हाउस आगे बढ़ाने का माद्दा दिया।

पंडित रविशंकर और अनुष्का

सितारवादक पंडित रवि शंकर ने खुद कला के तमाम कीर्तिमान बनाए। बेटी को ये कला सिखाने के लिए उन्होंने अनुष्का के 7 साल का होते ही कोशिश शुरू कर दी थी। उन्होंने अनुष्का के लिए एक छोटा वाद्य बनवाकर सिखाना शुरू किया। फिर एक दिन वह भी आया जब अनुष्का ने पापा के साथ संगत देना शुरू किया। ये सिलसिला अब सोलो परफॉर्मेस और कभी-कभी एक साथ आज भी जारी है।

अनुष्का को अपने काम के लिए 1998 में हॉउस ऑफ कामंस में ‘द ब्रिटिश पार्लियामेंट अवार्ड’ से नवाजा गया। वह इस सम्मान को हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की पहली महिला बनीं। पंडित रविशंकर कह भी चुके हैं-‘मैं अनुष्का के पिता बतौर पहचाना जाना चाहता हूं, वह स्प्रिचुअल तरीके से संगीत के साथ जुड़ती है।’

पापा जैसी बेटी नागेश सुर्वे और उनकी बेटी रूपाली सीटी को गैरमामूली तरीके से बजाकर इसे एक कला के तौर पर निखार रहे हैं। खास बात यह है कि पापा तो लड़कों के लिए बजाते ही हैं, लेकिन रूपाली लड़की होकर भी कई हीरोज के लिए सीटी बजाती हैं। वह बॉलीवुड की पहली ‘विसिल वुमेन’ बन गई हैं।

फाइटर डॉटर

राकेश रोशन की अपनी बेटी सुनयना से जरा हटकर रिलेशनशिप है। राकेश खुद को जहां बेहद इमोशनल बताते हैं वहीं अपनी बेटी को दिल से बेहद मजबूत। कुछ समय पहले जब सुनयना के कैंसर पीड़ित होने की खबर आई तो पूरा परिवार गमगीन हो गया। ऐसे में सुनयना ने ही सबको ढाढ़स बंधाया और उम्मीद बांधे रखी। ठीक होने के बाद सुनयना ने पापा को ‘क्रेजी 4’ के प्रोडक्शन में भी मदद की। वहीं बेटे रितिक से भी पापा रोशन का बहुत मजबूत बांड है। वे रितिक को बात मानने और इज्जत करने वाला बच्च बताते हैं।

युवी से सांस लेता हूं

क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने अपना सपना बेटे के जरिये पूरा होते देखा है। योगराज खुद भारत के लिए 1991 में टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं। अपने और युवी के साझा सपने को पूरा करने के लिए योगराज ने घर के आंगन में सीमेंट की पिच बनवाई, नेट लगवाया, लाइट लगवाईं। लंबे समय तक युवी का इंट्रेस्ट बनाए रखने के लिए उसे कई बेट लाकर दिए। जिसके चलते आज भी घर में करीब 200 बेट और ढेरों ग्लव्ज मौजूद हैं।

वे युवी को दिन में 10 घंटे प्रैक्ट्सि करवाते थे जिससे लोग उन्हें पागल कहते रहे, लेकिन आज नतीजा सामने है। हालांकि बेटे को भारत की कैप्टनशिप न मिल पाने का योगराज को अफसोस है, पर वे मानते हैं कि वक्त के साथ यह खुशी भी जरूर मिलेगी। कैप्टन होने से ज्यादा वे देश के लिए खेलना जरूरी मानते हैं। युवराज को यहां तक पहुंचाने में वह अपनी पत्नी का भी काफी योगदान बताते हैं-‘युवराज मुझे देने के लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं।’





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