वैज्ञानिकों ने इस दुनिया को बहुत कुछ दिया है। यह अलग बात है कि कई वैज्ञानिक अपनी ही खोजों और आविष्कार के सिलसिले में मारे भी गए है। इन सभी वैज्ञानिकों की मानव जाति हमेशा ऋणी रहेगी। एक नजर डालते हैं ऐसे ही शीर्ष पांच विज्ञानियों पर, जिन्होंने मानव जाति की भलाई के लिए काम करते हुए मौत को गले लगाया। विज्ञान के क्षेत्र में इन लोगों की शुरुआत असाधारण थी और इनमें से कई ने तो मनुष्य के लिए हुई महान खोजों और आविष्कारों का मार्ग प्रशस्त किया।
कार्ल शील :खोजी गई वस्तु को चखने के बाद हुई मौत
क्लोरीन, मैगनीज, टंगस्टन और ऑक्सीजन जैसे कई रासायनिक तत्वों की खोज करने वाले कार्ल शील एक शानदार फार्मास्यूटिकल केमिस्ट थे। यह अलग बात है कि ऑक्सीजन पर जोसेफ प्रीसले के तथ्य पहले प्रकाशित हुए। कार्ल को खोजी गई वस्तु को चखकर जांचने की आदत थी और किस्मत से वह हाइड्रोजन सायनाइड का स्वाद लेने के बाद बच भी गए थे। लेकिन बाद में उन्हें अपनी इसी आदत की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। जांच से पता चला कि मरकरी का जहर फैलने के कारण उनकी मौत हुई थी।
जीन फ्रैंकुआ डी रोजिए : हवाई दुर्घटना के पहले शिकार
यूं तो जीन फ्रैंकुआ भौतिकी और रसायन के शिक्षक थे। 1783 में दुनिया के पहले उड़ने वाले गर्म गैस के गुब्बारे को देखकर उनके अंदर भी उड़ान भरने की इच्छा जाग उठी। भेड़, मुर्गा और बतख की सफलतापूर्वक उड़ान में मदद करने के बाद वह खुद भी गर्म हवा के गुब्बारे में बैठकर उड़े। उन्होंने गुब्बारे में बैठ कर 3000 फुट की ऊंचाई नापी। इससे उत्साहित होकर उन्होंने गुब्बारे से इंग्लिश चैनल पार कर फ्रांस से इंग्लैंड जाने की योजना बना डाली। बदकिस्मती से यह उनकी आखिरी उड़ान साबित हुई। डेढ़ हजार फुट की ऊंचाई पर गुब्बारे में गैस खत्म हो जाने के कारण धरती पर गिरने से उनकी मौत हो गई। आठ दिन बाद उनकी होने वाली पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। माना जाता है कि उनकी पत्नी ने आत्महत्या की थी।
एलिजाबेथ एसचेम :एक्स-रे से हुई मौत
अपनी मां के निधन के बाद एलिजाबेथ फेइसमैन एसचेम ने डॉ. वुल्फ से विवाह कर लिया था। चिकित्सा विज्ञान से जुड़े होने के कारण वुल्फ की एक्स-रे में काफी दिलचस्पी थी। उनकी पत्नी का भी इस तरफ रुझान था इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर इलेक्ट्रिकल साइंस की पढ़ाई शुरू कर दी। फलत: वह एक एक्स-रे मशीन भी खरीद लरई और उसे अपने पति के क्लीनिक में रख दिया। सेन फ्रांसिसको की यह पहली एक्स-रे लैब थी। कई सालों तक दोनों ने एक्स-रे मशीन से एक-दूसरे पर कई प्रयोग किए। बिना सुरक्षा के इस मशीन को इस्तेमाल करने के नतीजों के बारे में दोनों को पता न होने के कारण एलिजाबेथ को कैंसर हो गया, जो उनकी मौत का कारण बना।
एलेक्जेंडर बोगानोव :ब्लड ट्रांसफ्यूजन बना मौत का सबब
बोगानोव रूस में चिकित्सक होने के साथ-साथ दार्शनिक, अर्थशास्त्री और क्रांतिकारी भी थे। 1924 में उन्होंने चिर युवा बने रहने का तरीका ढूंढ़ निकालने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ कई प्रयोग किए। खुद का 11 बाद ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने के बाद उन्होंने अपने गंजेपन के खत्म होने और आंखों की रोशनी में और सुधार आने का दावा किया। यह अलग बात है कि अपने प्रयोग के दौरान उन्होंने दानकर्ता के खून और उसके स्वास्थ्य की कभी जांच नहीं की। इसी के चलते 1928 में मलेरिया और टीबी से ग्रसित व्यक्ति का खून अपने शरीर में चढ़ाने से उनकी मौत हो गई।
लुइस स्लोटिन :विखंडन क्रिया बनी मौत का कारण
कनाडा में जन्मे स्लोटिन पहला न्यूक्लियर बम बनाने की अमेरिकी परियोजना ‘मैनहैट्टन प्रोजेक्ट’ पर काम करते थे। प्रयोग के दौरान उन्होंने गलती से बेरेलियम के एक गोले को दूसरे गोले पर गिरा दिया, जिससे एक खतरनाक प्रतिक्रिया हुई। कमरे में काम कर रहे दूसरे वैज्ञानिकों ने नीले रंग की रोशनी निकलती देखी और हवा की गर्म लहर को भी महसूस किया। इसके बाद स्टोलिन बीमार पड़ गए।
उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और 9 दिन बाद उनकी मौत हो गई। बाद में पता चला कि उन्होंने विकिरण की जो मात्रा झेली थी वह एटम बम के फटते वक्त 4800 फीट की दूरी पर खड़े रहने के बराबर थी।