मुंबई. अगर आप इंटरनेट बैंकिंग या एटीएम का पासवर्ड भूल गए हैं तो उसे हासिल करने के लिए कीमत चुकाना होगी। कुछ बैंक दोबारा पासवर्ड भेजने के लिए 25 रुपए वसूलने की योजना बना रहे हैं। इन बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक भी शामिल हैं। किसी तिमाही में नकदी लेन-देन 12 बार से ज्यादा हो जाता है तो आईसीआईसीआई बैंक हर लेन-देन पर 50 रुपए वसूलता है।
कोटक महिंद्रा बैंक के केवीएस मैनियन का कहना है कि उनका बैंक पासवर्ड के लिए तो शुल्क नहीं लेता। लेकिन लोग बार-बार पासवर्ड मांगते हैं तो यह बैंक के लिए िचंता की बात है। आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड धारक 1 जून 2008 से बैंक शाखाओं पर नकद भुगतान पर 100 रुपए का शुल्क चुका रहे हैं। बैंक के कार्ड विभाग के सचिन खंडेलवाल का कहना है कि ग्राहक नकद जमा न करें इसके इसके लिए 100 रुपए वसूले जा रहे हैं।
यह केवल कार्ड के बारे में नहीं है। यह नकद जमा के लिए है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक पहले ही मार्च 2006 से उन लोगों से 99 रुपए वसूल रहा है, जो शाखा में भुगतान करते हैं।
मैनियन की राय में नकद जमा और निकासी पर शुल्क लगाने की योजना है। बैंकों के तरीके अलग-अलग हैं। बैंक नियम भी बना रहे हैं। हम नकद को घटाना चाहते हैं। सबसे ज्यादा भारी पड़ता है तिमाही बैलेंस नहीं बनाए रखने पर 750 रुपए का शुल्क।
इसकी खास बात यह है कि खाते में औसत बैलेंस 0 हो या 4999 रुपए, यह शुल्क लग जाता है। कुछ बैंक दस फीसदी कम बैलेंस तक शुल्क नहीं लगाते। पहले बैंक 250-500 रुपए का शुल्क वसूल रहे थे। अब सभी निजी बैंक 750 रुपए लेते हैं।
कोई जमाकर्ता बैंक की शाखा जाता है तो उसे केवल पहले पांच लेन-देन की मुफ्त होंगे, बाकी में हर लेन-देन पर 50 रुपए लगेंगे। चेकबुक के लिए भी बैंक हर लीफ के लिए 5 रुपए लेता है।
रिजर्व बैंक कोशिश कर रहा है कि ये शुल्क वाजिब हों। दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करने पर उसे शुल्क घटाने में सफलता मिली भी है। अप्रैल 2009 से यह मुफ्त भी हो जाएगा। 1999 तक इंडियन बैंक्स एसोसिएशन इन शुल्कों का निर्धारण करता था। उसके बाद से बैंक खुद तय करते हैं। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे इन शुल्कों को तर्कसम्मत बनाएं।