मुंबई.
मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी का झगड़ा एक बार फिर से उभर आया है। कारोबार के बंटवारे को लेकर उलझे अंबानी इस बार कारोबार में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में उलझ गए हैं। दोनों ने एक बार फिर से कानूनी तलवारें म्यानों से बाहर निकाल ली हैं।
अंबानी भाइयों की कहानी
>>धीरूभाई अंबानी की मृत्यु के बाद वर्ष २क्क्५ में उनके बड़े बेटे मुकेश व छोटे बेटे अनिल में रिलायंस समूह की संपत्ति पर अधिकार के लिए झगड़ा छिड़ गया।
>> मां कोकिलाबेन ने दोनो को एक रहने की नसीहत दी। न मानने पर रिलायंस समूह का विभाजन करना पड़ा।
>>बड़े बेटे मुकेश को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), रिलायंस इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर लि. व रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स लि. पर अधिकार मिला। छोटे बेटे अनिल के पाले में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल आदि महत्वपूर्ण कंपनियां आईं।
>>इसके बाद हर मोड़ पर दोनो के बीच व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता देखी गई। कभी देश में पुलों के निर्माण को लेकर तो कभी कृष्णा-गोदावरी गैस परियोजना को लेकर दोनो भाई एक दूसरे से अजनबियों की तरह झगड़ते रहे। मुकेश अंबानी द्वारा स्पेशल इकोनॉमिक जोन के लिए ऊर्जा संयंत्र लगाने को लेकर दोनो के बीच छिड़ा झगड़ा खासा चर्चित हुआ।
नया विवाद
अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकाम) के दक्षिण-अफ्रीकी टेलीकॉम कंपनी एमटीएन में विलय के लिए अरबों डालर का सौदा होने की संभावना है। सौदा फायनल होते ही अनिल नई कंपनी में प्रमुख हिस्सेदार होंगे व उनका व्यावसायिक कद बढ़ जाएगा। मुकेश का दावा है कि रिलायंस समूह के विभाजन के समय दोनो भाइयों ने ‘राइट ऑफ फस्र्ट रिफ्यूजल’ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।
इसके अनुसार आरकाम किसी दूसरी कंपनी को बेचने से पहले उसकी पेशकश मुकेश को की जानी चाहिए। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली आरआईएल ने आरकॉम व एमटीएन, दोनो को पत्र लिखकर इस औपचारिकता को पूरा करने का दबाव डाला। ऐसा न करने पर कानूनी परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। अनिल का कहना है कि ऐसे किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए गए व मुकेश का दावा बेबुनियाद है।
मिल जाएं तो छा सकते हैं अंबानी बंधु
फोब्र्स द्वारा तैयार विश्व के सबसे धनी व्यक्यिों की सूची में मुकेश का 5वां स्थान है व अनिल इस सूची में छठे स्थान पर हैं। दोनों की संयुक्त पूंजी तकरीबन ८५ अरब डॉलर है। दोनो भाई मुंबई के अपमार्केट एरिया में स्थित एक ही बिल्डिंग में रहते हैं।
ऐसे भड़का एमटीएन पर झगड़ा >>12 जून: आरआईएल ने एमटीएन व आरकॉम को पत्र लिखकर राइट आफ फस्र्ट रिफ्यूजल का अनुपालन करने को कहा।
>>13 जून: आरकॉम ने कहा आरआईएल का दावा एकतरफा अनुबंध की देन है।>>14 जून: आरकॉम ने आरआईएल को क्षतिपूर्ति वसूलने की चेतावनी दी।
>>15 जून: आरकॉम ने कहा यह राइट कंपनी के आर्टिकल आफ एसोसिएशन में शामिल नहीं है। आरआईएल ने कहा दोहरे मानदंड अपना रही है आरकॉम।
अनिल दोहरे मानदंडों का सहारा ले रहे हैं। उन्हें आरकॉम के संबंध में राइट आफ फस्र्ट रिफ्यूजल का पालन करना होगा।-आरआईएल के चेयरमैन, मुकेश अंबानी (थोड़ा भद्र भाषा में)
आरआईएल का दावा बेबुनियाद है, जिसका कोई विधिक आधार नहीं है।
-एडीएजी समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी (तेवर के साथ)