अमृतसर.
किचलू चौक में पूर्व डिप्टी स्पीकर प्रो. दरबारी लाल के परिवार की बिल्डिंग ‘ओपन स्पेस ग्रीन लैंड’ पर आखिर पंजाब सरकार की गाज गिर गई है। सरकार ने जांच के बाद भ्रष्टाचार निरोधी कानून और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज करने के लिए मामला विजीलैंस विभाग को सौंप दिया है। इसके अलावा नगर निगम जालंधर के एक्सिएन गुरचरण सिंह पर भी विभागीय कार्रवाई को कहा है।
प्रदेश सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पास बिल्डिंग प्लान रद्द करते हुए पहले से मंजूर ओपन स्पेस ग्रीन लाइन का स्टेट्स बरकरार रखने को कहा है। सरकार के आदेशों के बाद इस बिल्डिंग का एक बार फिर धराशायी होना लगभग तय माना जा रहा है।
स्थानीय निकायमंत्री मनोरंजन कालिया ने बताया कि बिल्डिंग को लेकर जिला शिकायत निवारण कमेटी के सदस्य नरेश शर्मा ने शिकायत की थी। इस पर 1 मार्च को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी लोकलबॉडी सैक्रेटरी को विभागीय जांच को कहा था। मालूम हो कि बिल्डिंग पूर्व डिप्टी स्पीकर प्रो. दरबारी लाल की पत्नी वीना रानी, करणबीर वर्मा और राजेश वर्मा के नाम पर है।
मेयर की हुई थी शिकायत
ओपन स्पेस ग्रीन लैंड को कमर्शियल करने पर अपनों ने ही तत्कालीन मेयर सुभाष शर्मा की शिकायत की थी। आउट ऑफ एजैंडा आई इस आइटम पर बिफरे पार्षद बख्शीराम अरोड़ा व बृजमोहन कपूर ने मेयर के खिलाफ लोकलबॉडी मंत्री बलराम दास टंडन को शिकायत की थी। इसके चलते बाद में प्रस्ताव रद्द कर दिया गया।
पहले भी गिर चुकी है इमारत
मेयर ओम प्रकाश सोनी के कार्यकाल में इसी जगह पर बनी इमारत को 1992 में गिरा दिया गया। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा तो जज जे.एल. गुप्ता ने 1995 में इसे ओपन स्पेस ग्रीन लैंड घोषित करते हुए कमर्शियल प्लाट में बदलने की आज्ञा देने से मना कर दिया।
19 जून 1998 को निगम बैठक में इस संबंधी प्रस्ताव नंबर 40/11 आउट ऑफ एजैंडा आने से पार्टी के पार्षद बिफर गए। कचहरी चौक की जगह को लेकर लोकलबॉडी विभाग पर कितना दबाव था, इसका अंदाजा कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही दिखना शुरू हो गया था। फरवरी में सरकार बनने के बाद 20 मार्च 2002 और 22 अप्रैल 2002 को एडीशनल सैक्रेटरी लोकलबॉडी वीके ओहरी ने कमिश्नर को पत्र लिखकर पैंडिंग मामले निपटाने की सिफारिश की थी।
>> किचलू चौक में ‘ओपन स्पेस ग्रीन लैंड’ पर नियमों को दरकिनार कर बनी बहुमंजिला बिल्डिंग को लेकर 1 मार्च को मुख्यमंत्री से शिकायत की गई थी। उन्होंने बिल्डिंग स्कीम नंबर 9-बी की फाइल की जांच शुरू कराई थी। इसके आधार पर अब कार्रवाई हुई है। उम्मीद है ओपन स्पेस ग्रीन लैंड का पहले वाला स्टेट्स जल्द बहाल हो जाएगा।
नरेश शर्मा, जिला शिकायत निवारण कमेटी सदस्य
बदले की भावना से काम हुआ : लाल
प्रो. दरबारी लाल ने कहा कि सरकार ने बदले की भावना से काम किया है। जमीन के सारे कागजात हमारे परिवार के पास हैं। सरकार के नक्शे के मुताबिक 42 फुट ऊंचाई और साठ फीसदी क्वर एरिया तक दिया गया है। बिल्डिंग स्कीमों को बदलने का अधिकार सरकारों के पास होता है, जिसके मुताबिक ही पूर्व सरकार ने काम किया।
वैसे भी जगह को कमर्शियल करवाने के प्रयास 1997 में अकाली भाजपा गठबंधन सरकार के समय से ही शुरू हुए थे। हमारे परिवार ने निगम कर्मचारी गुरचरण सिंह से जमीन खरीदी है, जिसके नाम पर जगह के इंतकाल तक चढ़े हुए हैं।