मुंबई. 11 फीसदी पर पहुंची मुद्रास्फीति ने बैंकरों को भी चौंका दिया है। अब सभी बैंकर उम्मीद कर रहे हैं कि रिजर्व बैंक रेपो दरों में 0.25 फीसदी इजाफा कर सकता है। साथ ही सीआरआर बढ़ाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। बैंक धन की लागत बढ़ने पर होमलोन सहित रिटेल लोन और डिपाजिट की ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं।
अब रेपो दरों या बैंकों की अलग जमा राशि का अनुपात (सीआरआर) बढ़ाना होगा। मुद्रास्फीति नीचे नहीं आई तो ब्याज दरें बढ़ेंगी, क्योंकि डिपाजिट करने वालों के प्रतिफल नकारात्मक हो गए हैं।
-पीएल गायरोला, सीएमडी, देना बैंक
अब पूरी विकास दर धीमी हो जाएगी। रिजर्व बैंक की तरफ से हमें तत्काल कार्रवाई दिखाई देगी। सीआरआर में वृद्धि होगी। हम ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद करते हैं।
-अनंतकृष्णा, चेयरमैन, कर्नाटका बैंक
तरलता घटानी है तो सीआरआर बढ़ानी होगी। ब्याज दरें बढ़ेंगी, लेकिन मांग पर असर नहीं पड़ेगा।
वी सांतनारामन, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, बैंक आफ बड़ौदा
मुद्रास्फीति के 11 फीसदी पार करने की अनुमान नहीं था। कुछ महीनों में कम होने की उम्मीद करनी चाहिए। रिजर्व बैंक को हस्तक्षेप करना होगा। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो कर्ज की मांग पर असर तो पड़ेगा।
-प्रकाश पी माल्या, सीएमडी, विजया बैंक
हम अचानक ग्राहकों पर भार नहीं डाल सकते हैं। अभी स्थिति को देख रहे हैं। जब लागत पर असर पड़ेगा, भार ग्राहकों पर डाला जाएगा। इस मौके पर ऐसा फैसला नहीं ले रहे हैं।
-वी वैद्यनाथन, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, आईसीआईसीआई