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प्रतिभाओं को प्लेटफार्म देना ही उद्देश्य : केशव आर मुरुगेश

मुंबई. एस आई एफ ई (सिफी) भारत में औद्योगिक विकास की एक नई कहानी लिख रहा है। ये भारतीय होनहार छात्रों को विश्व के पटल पर एक ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध करवा रहा है जहां पहुंचकर भारतीय प्रतिभा पीछे मुड़कर नहीं देखती। इनका चयन क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर जीतने के लिए इन्हें टॉप कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के सामने बेहतरीन प्रजेंटेशन तो देना ही पड़ता है साथ ही उनके धारदार प्रश्नों के जवाब देकर उन्हें संतुष्ट भी करना पड़ता है। यहां जीतने के बाद उन्हें विश्व में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है।

क्या है सिफी :
एस आई एफ ई (सिफी) यानि स्टूडेंट्स इन फ्री इंटरप्राइज एक अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन है। इस संगठन के कोआर्डिनेटर्स देशभर में घूमकर प्रतिभा को उभारने के पावन प्रयास में संलग्न रहते हैं। इनकी उच्च प्रतिभावान और समर्पित विद्यार्थियों की टीम 45 देशों से भी ज्यादा देशों की लगभग 1500 से अधिक विश्वविद्यालयों में विश्व को एक नई दिशा में ले जाने को आतुर दिखते हैं। और हां , इनकी युवा शक्ति को कमतर मत आंकिए। ये कुछ भी कर गुजर सकने में समर्थ हैं।

कैसे आया अस्तित्व में :
अमेरिका में वालमार्ट की पहल पर एस आई एफ ई ने 1975 ई. में आकर ग्रहण किया था। भारतवर्ष में सिंटेल ग्रुप के द्वारा एस आई एफ ई (सिफी) को प्रमोट किया जा रहा है जो अंतर्राष्ट्रीय आई टी और नॉलेज प्रोसेसिंग संगठन के क्षेत्र में एक जाना पहचाना संगठन बन चुका है। सिंटेल ग्रुप में लगभग 12,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।

क्या कहना है सिफी इंडिया के चेयरमैन का :
keshavकेशव आर मुरुगेश भारतवर्ष में सिफी की सफल कहानी के नायक रहे हैं। सिंटेल के प्रेसिडेंट और चीफ ऑपरेटिव ऑफिसर केशव मुरुगेश ने पिछले चार सालों में सिफी को सफल बनाने में अथक प्रयास किया है।

भारत में सिफी के विकास पर उनका कहना है कि 2003 में इसके भारत आगमन के बाद 40 से अधिक विश्वविद्यालयों के अत्यधिक प्रतिभावान छात्रों को इस अभियान से जोड़ने में वे सफल रहे हैं। इनमें चेन्नई,भुवनेश्वर, कोलकाता, मुंबई, पुणे , अहमदाबाद, दिल्ली, गुड़गांव, जयपुर, बेंगलुरु और चंडीगढ़ के विश्वविद्यालय शामिल हैं।

सिफी इन प्रतिभावान छात्रों को एक बेहतरीन प्लेटफार्म उपलब्ध करवाता है जिसके माध्यम से ये छात्रगण नेतृत्च विकसित करना,टीमवर्क और बेहतर संवाद स्थापित करना सीखते हैं। स्वतंत्र उद्यम के मूलभूत सिद्धांतों को प्रयोग में लाते समय ये छात्र पूरी प्रक्रिया में कई हजारों लोगों का भला कर जाते हैं।

केशव जी का आगे क हना है कि सिंटेल का मुख्य उद्देश्य सिफी छात्रों को उच्चतम स्तर के कॉरपोरेट्स और बिजनेस लीडर्स द्वारा सही दिशा निर्देश दिलवाना है। हम कॉलेज के विद्यार्थियों को शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स के माध्यम से समझाने का प्रयास करते हैं। इसमें बाजार की आर्थिक रूपरेखा,व्यवसायिक उद्यमिता, निजी और वित्तीय सफलता के साथ साथ व्यापार के मूल्यों से भी उन्हें भली भांति अवगत करवाया जाता है जिससे वे अपने साथ साथ अपने समाज और देश की प्रगति में भागीदार बन सकें।

इस बार का आयोजन:
पहले क्षेत्रीय स्तर पर चुनी गई टीम राष्ट्रीय स्तर पर टॉप सीईओज द्वारा जांचे परखे जाते हैं। यहां सफल होने पर उन्हें विश्व स्तर पर अपने आपको साबित करने का मौका मिलता है। इस बार तीन क्षेत्रों चेन्नई, दिल्ली और मुंबई के कॉलेज टीमों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रबंधकीय क्षमताओं को प्रदर्शित किया है।

इस साल का सिफी विजेता अल्फा आर्टस एंड साइंस कॉलेज,चेन्नई को घोषित किया गया। winnerमुंबई के ग्रैंड हयात होटल में इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का फाइनल 20 जून को संपन्न हुआ। रनर अप टीम रही बंगाल की जेआईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग। सिफी विजेता चेन्नई की टीम 1-3 अक्टूबर 2008 को सिंगापुर के विश्व कप प्रतियोगिता में भारत को प्रतिनिधित्व प्रदान करने का गौरव हासिल करेगा।

पिछले साल भी मुंबई में इसी दिन 7 क्षेत्रीय टीमों का चयन राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के लिए हुआ था। गत वर्ष सिफी वर्ल्ड कप न्यूयार्क में हुआ था जिसमें एशिया से सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली एकमात्र टीम सिफी लोयला टीम रही थी।

किनसे मिल रहा है समर्थन:
भारत में सिफी को कई कॉरपोरेट घरानों से समर्थन हासिल हो रहा है जिसमें सिंटेल,केपीएमजी,रिलायंसमनी,एचएसबीसी,ईस्टमैन केमिकल लिमिटेड और लवलॉक एंड लिविस/प्राइस वाटरहाउस शामिल हैं।

>> सिफी भारतवर्ष में जो सराहनीय कार्य कर रहा है उसका देश के औद्योगिक परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। बेहतर होगा इसमें ज्यादा से ज्यादा कॉलेजों की भागीदारी सुनिश्चित करवाई जाए।
सुदीप बंदोपाध्याय, डायरेक्टर और सीईओ रिलायंस मनी





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akhiless
Saturday, 21st Jun 2008, 20:24
this is realy a great idia but it not for those cadiate who belongs a small town and norrmel standerd education even if they get the chance they shall perform very wel. so there must be some system for normel but intaligent students
visha agrawal
Sunday, 22nd Jun 2008, 10:50
This is great way to enhance a quality of person.Because some of person have extra ordinary but lack of resourse they are unable to come in higher education.so please keep trying to contine such type of activity.that will help to all those people...