जालंधर. गरीबों के भले के लिए जिला मुख्यालयों में खोले जाने वाले फेयर प्राइस शॉप्स का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। फेयर प्राइस शॉप्स खोलने के लिए पंजाब हैल्थ सिस्टम कापरेरेशन (पीएचएससी) को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। पीएचएससी का पायलट प्रोजैक्ट अभी शुरू ही नहीं हो पा रहा है, जबकि इस प्रोजैक्ट को पिछले छह माह से लाइन पर लाने की कवायद की जा रही है।
पंजाब कैमिस्ट एसोसिएशन (पीसीए) का रोड़ा इस प्रोजैक्ट को आगे नहीं बढ़ने दे रहा है। पीसीए का केस तो अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। कापरेरेशन ने पहले शर्त रखी की जेनैरिक दवाओं पर 65 फीसदी और अन्य कंपनी की दवाओं पर 35 फीसदी तक की छूट देने वाले को ही शॉप दी जाएगी, लेकिन अब इस शर्त को बदल दिया गया है। अब सबसे कम रेट कोड करने वाले को टैंडर दिया जाएगा। इसमें रेट की कोई प्रतिशत सीमा नहीं रखी गई है।
मिलेंगी सस्ती दवाएं
इससे सिविल अस्पताल में इलाज करवाने वाले मरीजों को सस्ते इलाज के साथ-साथ दवा भी सस्ती मिलेगी। इस प्रोजैक्ट के तहत जिला स्तर पर एक-एक मैडिसन शॉप खोली जाएगी, जिसको ठेके पर दिया जाएगा। ठेकेदार इन दवाओं को प्रिंट रेट से कम दामों में लोगों को उपलब्ध करवाएगा।
11 अप्रैल को खुले टैंडर रद्द
हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद कारपोरेशन ने फेयर प्राइस शॉपस खोलने के लिए 11 अप्रैल को टैंडर किए थे। इन टैंडरों को रद्द कर दिया गया है, क्योंकि इन टैंडरों के खिलाफ पंजाब कैमिस्ट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केस अभी विचाराधीन है।
इसलिए किया पीसीए ने विरोध
पीसीए के पदाधिकारियों का मानना है इस फैसले से कुछ लोगों को ही फायदा होगा। शॉप मालिक कुछ डॉक्टरों के साथ सैटिंग करके उनके ब्रांड बेचने, सस्ता बेचने के चक्कर में अपनी कुछ सस्ती या लोकल मैडिसन बेचने और हल्के स्टैंडर्ड की दवाइयां बेच सकते हैं।
नकली दवाइयों के चलन का भी अंदेशा है। इसके अलावा कैमिस्टों को भी भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस शॉप के लिए ब्रांडेड दवाइयों पर प्रिंट रेट से 35 प्रतिशत कम दाम और जैनेरिक दवाओं पर 60 प्रतिशत छूट की मांग कर रही है। जो संभव नहीं है।
>> फेयर प्राइस शॉपस के मामले में दोबारा से टैंडर करने के आदेश आ चुके हैं, लेकिन अभी शर्ते व गाइड लाइन आना बाकी है। आदेश आते ही टैंडर करवा दिए जाएंगे।
डॉ. जे.पी. सिंह, सिविल सर्जन, जालंधर