मुंबईमहंगाई की दर के 13 साल के शिखर पर पहुंचने के बाद देश के शेयर बाजारों में धारणा पूरी तरह से कमजोर दिखाई दे रही है। ऐसे निवेशकों के हौसले भी पस्त दिखाई दे रहे हैं जो अब भी बाजार में तेजी की उम्मीद लगाए कारोबार कर रहे थे। सोमवार को बिकवाली का जोर बने रहने से सेंसेक्स और निफ्टी भारी उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट से उबर नहीं पाए। शाम को सेंसेक्स 278 अंक गिरकर 14,293 के स्तर पर दस माह के न्यूनतम पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी भी 4,300 का मनौवैज्ञानिक स्तर तोड़ते हुए 81 अंक गिरकर 4,266 के स्तर पर बंद हुआ।
क्या वजह:
कारोबारियों के अनुसार विश्व बाजार से कमजोरी के संकेत थे, लेकिन एक वैश्विक निवेश बैंकर द्वारा सेंसेक्स के लिए दिसंबर 2008 का पूर्वानुमान घटाए जाने के बाद बिकवाली का जोर बढ़ गया। मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि उसने दिसंबर 2008 के लिए सेंसेक्स का पूर्वानुमान घटाकर 13,224 कर दिया है, जो पहले उसने 14,571.29 व्यक्त किया था। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि सुबह के दौरान मात्र एक घंटे के कारोबार में सेंसेक्स में 350 अंक तक की गिरावट देखी गई। पिछले चार सत्रों से जारी गिरावट में सेंसेक्स 1404 अंक गिरकर 10 माह के न्यूनतम पर आ चुका है। इससे पहले सेंसेक्स 23 अगस्त 07 को 14,164 के स्तर पर बंद हुआ था।
चौतरफा बिकवाली:
सेंसेक्स को नीचे बंद कराने में कैपिटल गुड्स, मेटल, पावर, रियल्टी, ऑटो, ऑयल एंड गैस और बैंक शेयरों की अहम भूमिका रही। चौतरफा बिकवाली के बीच आरआईएल और एलएंडटी के शेयर दस माह के न्यूनतम स्तर को छू गए। कारोबार के दौरान आरआईएल के शेयर ने जहां 1,984.05 का स्तर छुआ वहीं एलएंडटी 2380 का लो बनाया।
क्या होगा :
विश्लेषक बाजार की धारणा कमजोर देखते हुए सूचकांकों के न्यूनतम स्तर का अनुमान बताने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक बाजार की नजरें महंगाई को काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा उठाए जाने वाले कदमों और बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी पर टिक गई हैं। एमके स्टॉक ब्रोकर्स के हैड ऑफ रिसर्च दलजीत कोहली का कहना है, बाजार की धारणा काफी नकारात्मक हो चुकी है। निवेशकों में डर है निकट भविष्य में ऋण की लागत बढ़ने के कारण कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।