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जेल में 4 हजार नशीले कैप्सूल पकड़े

जालंधर. जेल में नशीले पदार्थो के सौदागर चांदी कूट रहे हैं। सोमवार दोपहर महिला बैरक की ओर से फैंके गए काले रंग के बैग में से लगभग चार हजार नशीले कैप्सूल, लगभग 2 हजार नशीली गोलियां, 1 मोबाइल फोन और 3 चार्जर निकले।

जेल कर्मचारी ने तत्काल मामला अपने सीनियर के नोटिस में लाया। जेल सुपरिटैंडैंट जी.एस. सिद्धू ने माना कि जेल में नशीले पदार्थ फेंके जाते हैं। हालांकि उनके मुताबिक सोमवार को फेंकी गई खेप में लगभग 600 कैप्सूल निकले। इसके अलावा और कुछ नहीं। एसएचओ सुखजीत सिंह का कहना है कि जेल में नशीले पदार्थ बरामद होने वाले जेल प्रशासन की ओर से कोई शिकायत नहीं दी गई।

रविवार को जेल में उस समय हलचल मच गई जब जेल में नशीले पदार्थो की खेप फेंकी गई। जब खेप खोली गई तो पुलिस में भारी संख्या में नशीले कैप्सूल निकले। इस मामले की भी पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी गई।

जेल अधिकारी जी.एस. सिद्धू ने माना कि शुक्रवार को खेप फेंकी गई जिसमें लगभग हजार कैप्सूल निकले। रविवार को कोई खेप नहीं फेंकी गई। गौरतलब है कि बीते सप्ताह भी नशीले कैप्सूलों की खेप और 2 मोबाईल फोन मिले थे जो जेल प्रशासन ने कथित रुप से गोल कर दिए थे।

मोबाइल पर नशे का खेल
हालांकि जेल प्रशासन दावा करते हैं कि जेल में कोई मोबाइल फोन नहीं चलता, लेकिन जेल में नशीले पदार्थ की खेप फेंकने के मामले पर नजर दौड़ाई जाए तो बात साफ है कि जेल में नशे का खेल मोबाइल पर हो रहा है।

होता यह है कि जेल में बंद कैदी जेल में ही मोबाइल से फोन कर अपने करिंदे को खेप फेंकने को कहता है। सिग्नल मिलने पर खेप फेंकी जाती है और जेल में कुछ दागी मुलाजिमों की मदद से खेप तस्कर तक पहुंच जाती है लेकिन कई बार ईमानदार मुलाजिमों के आगे उनकी दाल नहीं गलती। अब सवाल उठता है कि जेल प्रशासन को उन दागी कर्मचारियों को बदलकर ईमानदार कर्मचारी ही तैनात करने चाहिए।

कई बार तो जेल के बड़े बाबू पर भी उंगली उठती रही है। इसके साथ-साथ जेल प्रसासन लोकल पुलिस से मिलकर जेल के अंदर खेप फेंकने वालों पर शिकंजा कसे। गौरतलब है कि अक्तूबर 2006 में पूर्व डीआईजी (जेल) कुंवर विजय प्रताप सिंह ने जेल में नशीले पदार्थ का कारोबार करवा रहे जेल के बड़े अधिकारी बेनकाब किए थे।





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