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पंजाब में होती है पासपोर्ट की खरीदो-फरोख्त

जालंधर. passport पंजाब में पासपोर्ट बिकते रहे हैं। विदेश जाने की चाह में जहां लोग पासपोर्ट खरीदते हैं वहीं डिपोर्ट होने वाले लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने का भी प्रयास करते हैं और एजैंटों से पुराना पासपोर्ट खरीद लेते हैं।

डेढ़ साल में ऐसे 125 मामले पुलिस दर्ज कर चुकी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोआबा-माझा में वर्ष 2000 से लेकर अब तक बीस हजार लोगों ने पासपोर्ट गुम होने की डीडीआर पुलिस के पास दर्ज करवाई है।

यहां पर 150 एजैंट सक्रिय हैं जो पासपोर्ट खरीदने-बेचने से लेकर फर्जी नामों से पासपोर्ट लेकर देने का काम करते हैं। पिछले पांच सालों में अवैध रूप से विदेश गए 18 हजार युवक-युवतियां डिपोर्ट हो चुके हैं। गुप्तचर विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रैवल एजैंट हर साल फर्जी पासपोर्ट बनाकर ढाई सौ करोड़ रुपए कमा रहे हैं।

रहते विदेश में, पासपोर्ट यहां से
विदेशी युवकों को वहां की नागरिकता हासिल करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की जरूरत होती है। वे यहां रह रहे रिश्तेदारों की मदद से पुलिसकर्मियों से सांठगांठ कर पासपोर्ट लेने का प्रयास करते हैं।

एक युवक गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उसके इंग्लैंड निवासी भाई का पासपोर्ट ट्रैवल एजैंट ने नष्ट कर दिया। अब उसको वहां पासपोर्ट की जरूरत है। इसलिए उसने यहां एक एजैंट से बात की। वह 50 हजार मांग रहा था पर 40 हजार में सौदा हो गया। सारा काम वही करवा कर देगा।

अपराधी भी खरीदते हैं पासपोर्ट
कुख्यात और भगोड़े करार दिए गए अपराधी भी विदेश जाने के लिए पासपोर्ट खरीद रहे हैं। कुछ साल पहले थाईलैंड से 45 लाख रुपए के जाली नोट लेकर आए तस्कर जगतार सिंह ने भी इस माफिया के माध्यम से नकोदर के बलदेव सिंह से 50 हजार में पासपोर्ट खरीदा था।

इस पासपोर्ट की सहायता से वह तीन बार दुबई और थाईलैंड हो आया था। पुलिस ने जगतार के घर से यह पासपोर्ट बरामद किया था। बेअंत सिंह हत्याकांड का आरोपी जगतार सिंह तारा भी बुड़ैल जेल से फरार होने के बाद जाली पासपोर्ट पर भागा था।

अपराधी क्यों खरीदते हैं पासपोर्ट
किसी अपराधी को मामले में नामजद करने के बाद पुलिस उसका पासपोर्ट जब्त कर लेती है। अपराधी किसी दूसरे के नाम का पासपोर्ट खरीद कर बड़ी आसानी से विदेश भाग जाते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार डेढ़ साल में 15 अपराधियों से पुलिस जाली पासपोर्ट बरामद कर चुकी है।

अब तक डिपोर्ट
2001 से लेकर अब तक यहां विदेशों से 18 हजार पंजाबी युवक-युवतियां डिपोर्ट हो चुकी हैं। हर साल करीब तीन हजार युवक-युवतियां डिपोर्ट होती हैं। उधर, जब अमृतसर के रीजनल पासपोर्ट अधिकारी अमरजीत सिंह से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पासपोर्ट का गोरखधंधा यहां काफी समय से चल रहा है।

पासपोर्ट खरीदने और फर्जी नामों और दस्तावेजों से सबंधित सौ के करीब मामले तो मैं खुद दर्ज करा चुका हूं। दोआबा-माझा में सक्रिय एजैंट विदेश भेजने का झांसा देकर पासपोर्ट अपने पास रख लेते हैं। उसके बाद पासपोर्ट किसी अन्य को बेच कर उसको यह कह देते हैं कि उसका पासपोर्ट गुम हो गया है।

>> पासपोर्ट खरीदने-बेचने के मामले पुलिस के सामने काफी आ रहे हैं। एजैंटों का नैटवर्क तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
संजीव कालड़ा, जोनल आईजी, जालंधर





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