मुंबई.दो पीढ़ी पहले खुद रोजगार की तलाश में मुंबई आए ठाकरे परिवार को बाहर से आने वाले लोगों पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं बनता। यह तीखी प्रतिक्रिया पुणो यूनिवर्सिटी की महात्मा फुले चेयर के प्रोफेसर हरि नारके ने व्यक्त की है। नारके का मुख्य निशाना शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भतीजे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे पर था।
एनसीपी के मुखपत्र ‘राष्ट्रवादी’ के जून अंक में प्रकाशित लेख में नारके ने राज को सलाह दी है कि राज को पहले अपने दादाजी प्रबोधनकार ठाकरे (बाल ठाकरे के पिता) की जीवनी पढ़नी चाहिए, जिन्होंने मध्यप्रदेश में शिक्षा हासिल की और यह बात भी लिखी है कि कैसे जीवनयापन के लिए उन्होंने दूसरे राज्यों की यात्रा की। नारके ने कहा कि यह साबित करता है कि ठाकरे मुंबई के मूल निवासी नहीं हैं और खुद रोजगार की तलाश में यहां आए थे।
एनसीपी के मुखपत्र में ठाकरे के खिलाफ लेख का प्रकाशन भी चर्चा का विषय है, क्योंकि एनसीपी प्रमुख शरद पवार की गिनती ठाकरे के सबसे पुराने दोस्तों में होती है। लेख में नारके ने इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि प्रबोधनकार का लेख उनके ही आग्रह पर 1995 में महाराष्ट्र सरकार ने प्रकाशित किया था। नारके ने सवाल किया है कि खुद रोजगार की तलाश में आए लोगों को दूसरे लोगों पर हमला करने का अधिकार दिया किसने? 24 घंटे इतिहास की बातें करने वाले, अपनी ही दो पीढ़ी पहले के इतिहास को भला कैसे भूल गए?
हमारी पार्टी के मुखपत्र में छपे लेख की जिम्मेदारी लेखक की होती है। उसका हमारी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं होता। इस पर मैं क्या प्रतिक्रिया दे सकता हूं। आप सच्चई जानने के लिए ठाकरे परिवार से ही बात करें तो बेहतर होगा।
-अरुण गुजराथी, प्रवक्ता, एनसीपी
मैंने लेख पढ़ा नहीं है, इसलिए प्रतिक्रिया देना ठीक नहीं होगा।
रामदास कदम, शिवसेना के वरिष्ठ नेता।