कुरुक्षेत्र.तीन माह बाद भी व्यापारी मामचंद आत्महत्या मामले की जांच शुरू नहीं हो पाई है। जांच में देरी होने के कारण इस मामले से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की संभावना प्रबल है। सीएम द्वारा सीबीआई जांच कराने की घोषणा के बाद पुलिस की जांच भी बंद हो गई। इसी के साथ ही पुलिस ने उन 17 आरोपियों को छोड़ दिया, जिनकी पुलिस ने बाकायदा लिस्ट जारी की थी।
सीएम के पुन: सीबीआई को रिमाइंडर भेजने के बयान से मामले की गंभीरता पर प्रश्न चिह्न् लग गया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि जांच में देरी सुनियोजित रणनीति भी हो सकती है।
वर्तमान में व्यापारी मामचंद की परिजनों समेत आत्महत्या का मामला बेशक एक कदम आगे नहीं बढ़ा हो, लेकिन मृतक की माता बैंकों के लेनदेन में फंसी हुई है। सुसाइड नोट दीवार पर लिखा होने व आत्महत्या का स्थान स्पष्ट तौर पर अंकित होने के बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया। करनाल के निकट ३क् मार्च को प्रदीप की लाश मिलने के बाद दबाव बना तो पुलिस ने शवों की तलाश तेज की। कार में सात शव नहर में उसी स्थान से निकले जिस स्थान का जिक्र दीवार पर सुसाइड नोट में था।
व्यापारियों के दबाव में पिहोवा थाना प्रभारी व जांच अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। एक अप्रैल को लोगों ने पिहोवा शहर बंद कर विरोध जताया और सीबीआई जांच न होने तक अंतिम संस्कार न होने देने की बात कही। सीएम वहां पहुंचे और संस्कार से पहले पुलिस ने १७ आरोपियों की गिरफ्तारी करने की बात कही। सीएम ने सीबीआई जांच कराने के आदेश दिए। परिजनों का कहना है कि जांच न होने से साक्ष्य मिटने या मिटाए जाने की आशंका है।
बैंकों, एजेंसियों ने भेजे कानूनी नोटिसजिस कर्ज के मर्ज में मामचंद परिवार फंसा हुआ, उसी कर्ज को वसूलने के लिए बूढ़ी मां अंगूरी देवी के नाम वकील के मार्फत रिकवरी के लिए कानूनी नोटिस भेजा है। मामचंद के भाई श्यामलाल, रामलाल, ओमप्रकाश व छोटू और पड़ोसी जनक राज ने बताया कि करीब छह बैंकों व सरकारी खरीद एजेंसियों ने अलग-अलग छह नोटिस भेजे हैं और लाखों रुपए की रिकवरी जमा करवाने के लिए मामचंद की 80 वर्षीय बूढ़ी मां को पार्टी बनाया है। इसके अलावा मामचंद की बेटी शालिनी को भी नोटिस दिया गया।
उत्तराधिकार क्लेम करने वाले को है नोटिस
-लीड बैंक मैनेजर एसके सिंधी का कहना है कि किसी भी देनदार की मौत के बाद उस व्यक्ति को रिकवरी का नोटिस दिया जा सकता है, जो मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकार क्लेम करता है।
-एडवोकेट जय सिंह देसवाल कानूनन संपत्ति के वारिस से देनदारी की रिकवरी का दावा किया जा सकता है।
पीएनबी पिहोवा शाखा के प्रबंधक संजय कुमार का कहना है कि कानून विशेषज्ञों से राय लेने के बाद ही नियमानुसार नोटिस दिए गए हैं।
कान्फेड के स्थानीय प्रबंधक का कहना है कि इस समय सभी राइस मिलों से चावल की रिकवरी की जा रही है। यह चावल सरकार के कोटे का था, इसलिए मिल से रिकवरी की गई।
मामचंद के भाई श्यामलाल, रामलाल, ओमप्रकाश का कहना है कि अभी तक परिवार में संपत्ति के उत्तराधिकार के सवाल पर कोई बात ही नहीं हुई है। बैंकों ने खुद ही तय करके नोटिस दे डाले।
डीएसपी तेजबीर का कहना है कि हालांकि मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच के आदेश दे रखे हैं। जब तक सीबीआई जांच शुरू नहीं करेगी तब तक क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी गई है। हालांकि अब तक जांच अधिकारी आए नहीं हैं।