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बारिश के रंग: कहीं मंदा, कहीं तेजी

अमृतसर. sabzi दिन में चिलचिलाती धूप तो शाम ढलते ही ठंडी हवाओं का दौर। कभी तड़के मूसलाधार बारिश तो कभी देर रात तूफान। यह नजारा है जून महीने का, जिसका नाम जहन में आते ही गर्मी के यौवन का अहसास होने लगता है, लेकिन, मौजूदा समय में बरसात के दो रंगों से कारोबारी हैरान-परेशान हैं। बरसात का समय से पहले आगाज होने से पंखा, कूलर, शरबत, मुरब्बा, अचार की बिक्री में ठहराव आ गया है, वहीं हरी सब्जियों में अकड़ है।

स्थिति यह है कि एक ओर मंदी ने दुकानदारों के गल्ले की रौनक कम कर दी है तो कहीं तेजी ने खरीददारों के कदमों की आहट को धीमी कर दी है। एक समय था, जब कूलर खरीदने के लिए लोग अप्रैल से बाजारों में निकल पड़ते थे। जून महीना खत्म होने को है, लेकिन इन्हें अब भी ग्राहक का इंतजार है।

अचार के थोक कारोबारी लक्की ने बताया कि तेज गर्मी में अचार काफी बिकता है, जबकि बरसाती मौसम में लोग इसे खाने से परहेज करते हैं। इस कारोबार में एडवांस पैसा निवेश करना पड़ता है। अगर इस बार बिक्री न हुई तो इसका असर अगले सीजन पर भी पड़ेगा।

माल का स्टाक गोदाम में पड़ा, ग्राहकों के आने का इंतजार
कूलर व्यवसायी रमेश शर्मा की मानें तो इस बार 25 प्रतिशत बिक्री भी नहीं हुई है। जून में कूलरों की भरपूर मांग होती थी, लेकिन इस बार कुदरत के रंग न्यारे हैं। कारीगर बेकार बैठे हैं, माल का स्टाक पड़ा है, खरीददार नहीं मिल रहे।

दिल को ठंडक पहुंचाने वाला शरबत और मुरब्बा खुद ठंडा हो चुका है। गर्मी में इनकी खासी मांग होती है। इसके बावजूद ये शोकेसों में सजकर रह गया है। थोक कारोबारी गोदामों में पड़ा स्टाक देखकर चिंतित हैं। कारोबारी राजपाल सिंह के अनुसार बिक्री में 50 प्रतिशत गिरावट आई है।





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