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धमाकों में हिंदू गुटों का हाथ!

नई दिल्ली.खुफिया एजेंसियों के कुछ लोगों को यह संदेह पिछले वर्षो से सताता रहा है कि देश में हुए बम विस्फोटों में से कुछ में हिंदू कट्टरपंथी गुट या गुटों का हाथ रहा है। इन भरोसेमंद खुफिया सूत्रों को ऐसी आशंका होने के पीछे कुछ कारण भी हैं।

अप्रैल 2006 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए बम विस्फोट में पुख्ता सबूत मिले। इस शक्तिशाली बम विस्फोट में दो हिंदू कट्टरपंथी मारे गए और चार अन्य घायल हो गए। वे उस समय बम के पुर्जे जोड़ रहे थे।

पिछले दो सालों में हिंदू कट्टरपंथियों पर संदेह पुख्ता करने वाले और सबूत मिले। भारत में नियमित अंतराल पर होने वाले विस्फोटों में अचानक स्थानीय स्तर पर बनाए जाने वाले बमों का इस्तेमाल होने लगा। बमों का मुख्य तत्व आरडीएक्स का अब पाकिस्तान से तस्करी के जरिए लाया जाना बंद हो गया।

एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी के मुताबिक, कम से कम दो बम विस्फोट इस आशंका को मजबूत करते हैं कि हिंदू उन्मादी तत्वों का इनमें हाथ था। उन्होंने महाराष्ट्र के मालेगांव तथा दिल्ली की जामा मस्जिद में 2006 में हुए विस्फोटों के संदर्भ में यह बात कही। फिर भी कोई ठोस सबूत नहीं मिलने और नांदेड़ ही एकमात्र ऐसा मामला होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने हूजी और लश्कर -ए- तैयबा जैसे मुस्लिम गुटों पर ही ध्यान केंद्रित कर रखा था।

हालांकि हाल में मुंबई में कुछ स्थानों पर देशी बम रखने तथा विस्फोट होने के मामलों में सनातन संस्था और हिंदू जागृति समिति के पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान फिर हिंदू गुटों पर गया है।

एक खुफिया अधिकारी ने कहा, ‘हमें पता है कि कुछ अलग-थलग पड़े ऐसे हिंदू गुट हैं, जो बम विस्फोट करना चाहते हैं। पर अभी हमें उनका विस्तार व विशेषज्ञता का पता नहीं चला है। फिलहाल हम मानते हैं कि उन्हें अत्याधुनिक विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण नहीं मिला है।’





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