बीकानेर. इंदिरा गांधी नहर परियोजना में दो महीने पहले कर्मचारियों से लेकर अभियंताओं के 173 रिक्त पदों को तोड़ने के आदेश किए गए थे। इनमें कुछ पद ऐसे थे जो अभी भरे हुए हैं लेकिन नहर बोर्ड के अधिकारियों ने तुगलकी आदेश जारी कर इन पदों को तोड़ने का फरमान जारी किया था।
मामला जल संसाधन मंत्री तक पहुंचा तो इस आदेश को रद्द कराने के प्रयास शुरू हुए। सिंचाई मंत्री ने कर्मचारी यूनियन के सामने तो इन आदेशों को रद्द कराने का आश्वासन दिया था लेकिन दो दिन पूर्व नहर विभाग में जो निर्देश पहुंचे उनमें सिर्फ तोड़े जाने वाले पदों की क्रियान्विति पर रोक लगाने के लिए कहा गया है।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि आगामी आदेशों तक इन आदेशों की पालना नहीं की जाए। सरकार के इस पैंतरे से यह तय है कि विधानसभा चुनाव के बाद इन पदों को कभी भी तोड़ा जा सकता है। सरकार ने आईजीएनपी में भी चुनावी पैंतरा खेलना शुरू कर दिया है। कर्मचारी भी सरकार की इस नीति को भांप गए है और इस आदेश का विरोध करना शुरू कर दिया है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार की नीयति में कोई खोट नहीं है और पदों को बचाना चाहती है तो इन आदेशों को रद्द क्यों नहीं किया गया। क्रियान्विति नहीं करने का मतलब यह है कि भविष्य में मौका लगते ही इन पदों को तोड़ दिया जाएगा।
खास बात यह है कि मुख्य अभियंता कुंदनलाल भी कर्मचारियों को आश्वासन देते नहीं थक रहे थे कि पद नहीं तोड़े जाएंगे लेकिन सरकार इस आदेश से पद बचना नामुमकिन लग रहा है। आईजीएनपी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश महामंत्री कमल अनुरागी ने सरकार के इस निर्णय की निंदा करते हुए कहा कि क्रियान्विति पर रोक लगाकर पदों को सुरक्षित नहीं किया है। उन्होंने तुरंत आदेश को रद्द करने की मांग की है।
इस आशय का कोई आदेश आया है इस बारे में मुझे नहीं मालूम। पता करूंगा। रही बात भाषा की तो क्रियान्विति पर रोक का मतलब है फिलहाल पद नहीं टूटेंगे। इसके आगे कुछ नहीं कह सकता।
-कुंदनलाल, मुख्य अभियंता, आईजीएनपी