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दो घंटे तेज, फिर बरसा रिमझिम

इंदौर. rain बरसते मेघ का इंतजार करते लोगों ने जहां इंद्रदेव को मनाने के लिए विशेष प्रार्थना और टोटके अपनाने शुरू कर दिए थे, वहीं बुधवार को हुई वर्षा ने उनके चेहरे पर रौनक ला दी। बरसों से बारिश के लिए चले आ रहे टोटकों के विषय में लोगों का कहना है कि पानी लाने के लिए ये कवायदें भले ही वैज्ञानिक नहीं हो लेकिन वे इन्हें अपनाने में विश्वास करते हैं और ऐसा करने से बारिश आती भी है।

करीब एक पखवाड़े बाद आया मानसून सारी नाराजगी दूर कर गया। दो घंटे की झमाझम और फिर रिमझिम फुहारों ने शहर को सराबोर कर दिया। हालांकि बारिश केवल 8.8 मिली मीटर दर्ज की गई। दिनभर उमस के बाद शाम को बादल छाए। पहले हलकी बूंदाबांदी फिर जोरदार बारिश से सड़कों पर डोबरे भर गए।

अभी तक कुल 79.8 यानी तीन इंच से ज्यादा पानी गिरा है। इस बारिश से सबसे ज्यादा राहत सूखती सोयाबीन की बोवनी को मिली है। दो घंटे के पानी ने करीब 20 दिनों तक फसलों को जीवनदान दे दिया है।

कहीं तेज तो कहीं धीमा रहा वेग : बारिश की गति शहर के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रही। हवाई अड्डा स्थित मौसम केंद्र की तरफ पानी का वेग कम होने के कारण 8.8 मिमी का ही आंकड़ा रिकार्ड किया गया जबकि शहर के मध्य, तिलकनगर, कृषि महाविद्यालय, पलासिया, विजयनगर सहित कई इलाकों में जोरादार पानी गिरता रहा। पूरे शहर का सही आंकड़ा इसी वजह से दर्ज नहीं हो पाया।

जुलाई से होगी जोरदार : मौसम विभाग के निदेशक डॉ. डी.पी. दुबे का कहना है प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र में मानसून अभी कमजोर है। सक्रिय मानसून के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसी तरह रह-रहकर बारिश होती रहेगी। एक नया सिस्टम बन रहा है यह जून खत्म होने के बाद आमद देगा।

अभी किसान करें इंतजार : कृषि विभाग की सलाह है कि जिन किसानों ने बोवनी नहीं की है उन्हें अभी इंतजार करना चाहिए। जब तक बारिश का आंकड़ा पांच इंच पार नहीं कर जाए तब तक बीज लगाना ठीक नहीं है।

वैज्ञानिक बोले टोने-टोटके भ्रम है
चिल्ड्रन साइंस सेंटर के समन्वयक राजेंद्र सिंह का कहना है बारिश के लिए टोने-टोटके करना सिर्फ भ्रम है। ये मान्यताएं हैं जो चली आ रही है। बारिश को कोई भी अपनी मर्जी से नहीं करवा सकता है। ये सब पुरानी मान्यताएं हैं।

हवा का रुख बदलने के कारण अभी तक बारिश नहीं हो पाई थी। अब फिर कम दवाब का क्षेत्र बना है इसलिए आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की संभावना है। ग्लोबल वार्मिग की वजह से देश में कहीं बाढ़ और कहीं सूखे की स्थिति बनेगी।





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