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Shekhawati Shekhawati चिड़ावा. शहर के नए बस स्टैंड का नाम जरूर नया है लेकिन समस्याएं वो ही पुरानी। झुंझुनूं रोड पर बीएसएनएल कार्यालय के पास गैर मुमकिन जोहड़ की लगभग पांच हजार वर्गगज जमीन की घेराबंदी नया बस स्टैंड कहलाती है। इसका स्वामित्व नगरपालिका के पास है। बस स्टैंड परिसर कभी दो ढाई दशक पहले तक रोडवेज की बसों से आबाद हुआ करता था लेकिन आज यह निजी बसों एवं अन्य वाहनों का गैराज बनकर रह गया है।
नगरपालिका ने बस स्टैंड परिसर में 40 दुकानें किराए पर दे रखी हैं लेकिन उनमें किराया आधी का ही आता है वो भी नाममात्र का। बस स्टैंड परिसर झुंझुनूं और स्टेशन रोड से काफी नीचा रह जाने के कारण थोड़ी सी बरसात में तालाब बन जाता है।
फिर शुरू होती है यहां के दुकानदारों की लंबे समय तक जड़ जमा लेने वाली समस्याएं। देखरेख के अभाव में पूरा परिसर कचराघर बना हुआ है। रात में रोशनी का अभाव असामाजिक तत्वों की मौज बना देता है।
क्या कहती है पालिका
नगर पालिका चिड़ावा के ईओ आत्माराम लाटा का कहना है कि वित्तीय अभाव के कारण नया बस स्टैंड का विकास नहीं हो रहा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष आईडीएसएमटी योजना में इसके लिए प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन कुछ खामियों के कारण बात आगे नहीं बढ़ी। लाटा कहते हैं कि ट्रस्टों एवं भामाशाहों को प्रेरित करके ही नया बस स्टैंड का जीर्णोद्धार करवाया जा सकता है।
यात्री सुविधाओं का अभाव
दिनभर सैंकड़ों सवारी बसों के आवागमन को देखने वाले चिड़ावा शहर के नया बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। कहने को यहां शौचालय है लेकिन उसमें प्रवेश और उपयोग कर पाना मुश्किल। पीने के पानी की प्याऊ को थड़ी धारकों ने पूरी तरह से ढक दिया है। इसके चलते यात्रियों को पानी खरीदकर ही पीना पड़ता है। रोडवेज बसों के बुकिंग घर अरसे से बंद पड़े हैं।
रोडवेजकर्मी छोटे से विश्रामालय में टेबल डालकर टिकट काटते हैं जबकि निगम के द्वारा नगर पालिका को नियमित किराया चुकाया जा रहा है। रोडवेज और निजी बसें बस स्टैंड के अंदर नहीं जाकर झुंझुनूं रोड पर ही खड़ी रहती है।
इसके चलते शहर के मुख्य मार्ग पर अमूमन जाम ही लगा नजर आता है। बस स्टैंड परिसर और उसके तीन तरफ अतिक्रमण की समस्या आम है। चुनाव के वक्त अनाधिकृत दुकानों का निर्माण बस स्टैंड को नियमित रूप से छोटा कर रही है।