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जनाब! इसलिए नहीं है ‘फ्री’ नंबर

सीकर. call ‘हैलो, मैं स्वीटी बोल रही हूं। मेरे घर की लाइट खराब हो गई है। इसे ठीक कर देंगे।’ दूसरी ओर से हिदायत दी जाती है ‘मैडम यह फायर बिग्रेड का नंबर है। आप बार-बार क्यों फोन कर रही हैं’ ‘हां मुझे पता है’ बावजूद इसके स्वीटी आधे घंटे में सात बार फोन करती है। फिर घंटी बजती है ‘हैलो, मैं सुरेश सोनी बोल रहा हूं। आप हमारे घर पर दो किलो आलू भिजवा देंगे।..कर्मचारी फोन काट देता है।’

शायद आप सोच रहे होंगे कि यह कोई उपन्यास या कहानी का संवाद है, जी नहीं। यह गुफ्तगू का अंश है फायर बिग्रेड ऑफिस में मंगलवार रात आए कॉल का। फायर बिग्रेड ऑफस में ऐसे कॉल? यह जितना आपके लिए आश्चर्यजनक है, यहां के कर्मियों के लिए उतना ही दुखदाई। सरकारी दफ्तरों में फ्री नंबरों का दुरुपयोग इस कदर हो रहा है कि कर्मचारियों के लिए डच्यूटी करना बड़ी परेशानी बन चुकी है। कंट्रोल रूम भी इस बीमारी से अछूता नहीं है।

दरअसल कंट्रोल रूम का 100 और फायर बिग्रेड आफिस का 101 नंबर जनहित में नि:शुल्क है। ग्राहकों को यह सेवा इसलिए दी गई है, ताकि इमरजेंसी में सेवा ली जा सके। लेकिन, इन नंबरों का दुरुपयोग करने वालों की संख्या ज्यादा है। दिन-रात इन नंबरों पर कर्मचारियों को परेशान किया जाता है।

महिलाएं इस मामले में आगे हैं। ऐसी मौजमस्ती कर्मियों के लिए सजा बन गई है। काबिल-ए-गौर यह है कि इस दरम्यान यदि कोई जरूरतमंद संपर्क करता है तो ये नंबर बिजी ही मिलते हैं।

>> आपरेटर बुरी तरह खीज जाते हैं। इमरजेंसी सेवा होने के कारण कॉल रिसीव करना मजबूरी है। कलक्टर, एसपी और कोतवाल को कई-कई बार शिकायत कर चुके हैं। कॉल डिटेल तक दी है। साल भर से हम मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं, सुनने वाला कोई नहीं है।
रामेश्वरदयाल वर्मा, सहायक अग्निशमन अधिकारी

>> बोगस कॉल गले की हड्डी बनी हुई है। एसपी से भी मौखिक शिकायत कर चुके हैं। अधिकतर कॉल बच्चों के आते हैं। हैरानी की बात यह है कि 13 और 15 डिजिट के नंबरों से भी कॉल आती है। यह समझ से परे है। लेडी कांस्टेबिल को फोन कर परेशान किया जाता है।
जितेंद्र सिंह कंट्रोल रूम प्रभारी

‘100’ पर 100 बोगस कॉल
कंट्रोल रूम के पुलिस कर्मी भी कम पीड़ित नहीं हैं। लेडी कांस्टेबल ज्यादा ही त्रस्त हैं। कंट्रोल रूम में दिन भर में 100 बोगस कॉल आते हैं। खाकी के घटते रौब का इससे बड़ा नमूना और क्या होगा कि उन्हें फोन पर दिन में कई-कई बार परेशान किया जाता है, लेकिन वे असहाय बने रहते हैं। कई बार परेशान पुलिस वाले कॉलर को डांट भी देते हैं।

एक घंटे में 56 काल!
फायर बिग्रेड ऑफिस में बुधवार को एक घंटे में 56 काल आए। वह भी काम के नहीं, परेशान करने वालों के। पूरे दिन में करीब साढ़े चार सौ कॉल तक 101 नंबर पर आते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने सारे बोगस फोन रिसीव करने वाले कर्मियों का क्या हाल होगा। बुधवार को भास्कर प्रतिनिधि आधे घंटे तक ऑफिस में रुका। इस दौरान 26 कॉल आई।

सभी काल एयरटेल, टाटा इंडिकाम और वोडाफोन से थे। किसी ने घर में पानी न आने की बात कहकर फायर ब्रिगेड गाड़ी भेजने की बात कही तो कोई यूं ही टाइम पास करता रहा। खींजकर सहायक अग्निशमन अधिकारी ने एक-दो को फटकार भी लगाई, लेकिन कॉल आने का सिलसिला नहीं थमा।





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