नई दिल्ली.
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के पहले हिंदी बिजनेस अखबार ‘बिजनेस भास्कर को आर्थिक पत्रकारिता में एक ऊंची छलांग बताया है। अखबार का लोकार्पण करते हुए उन्होंने कहा कि आम लोगों की आवाज और उनके मुद्दे दिल्ली के बड़े अखबारों में जगह नहीं पाते हैं, मुझे विश्वास है कि बिजनेस भास्कर इस कमी को दूर करेगा और ये मुद्दे आपकी पत्रकारिता में अहमियत पाएंगे। उन्होंने कहा, ‘बिजनेस भास्कर को सही मायने में भाषाई आवाज बन कर उभरना चाहिए। खासतौर से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मध्य वर्ग की आप बुलंद आवाज बन सकते हैं।’
लोकार्पण के मौके पर बिजनेस भास्कर के संपादक यतीश राजावत ने जब उन्हें बताया कि लोगों का वित्तीय शिक्षण हमारा मुख्य मकसद है, क्योंकि इसके बिना वित्तीय समावेश संभव नहीं है तो प्रधानमंत्री ने पूरी सहमति जताते हुए कहा कि यह काम बिजनेस भास्कर करने में सक्षम होगा।
भारत में आर्थिक पत्रकारिता के विकास को एक सकारात्मक घटनाक्रम मानते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निवेशकों को सही और तथ्यात्मक जानकारी के जरिए शिक्षित करना मीडिया की जिम्मेदारी है। लेकिन आर्थिक पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार कुछ बड़े बिजनेस अखबारों की खबरों में वस्तुपरकता का अभाव दिखाई पड़ता है।
प्रधानमंत्री से जब पूछा गया कि वे खबरों में किस तरह की वस्तुपरकता की बात कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘मैं ज्यादा नहीं कहूंगा, लेकिन जाने-माने अमेरिकी पत्रकार वाल्टर लिपमैन ने कहा था कि तथ्य पवित्र होते हैं।’ भारत में आर्थिक पत्रकारिता के विस्तार और विकास की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम कई विकसित देशों से बेहतर स्थिति में हैं।
ब्रिटेन में केवल फाइनेंशियल टाइम्स ही एक प्रमुख आर्थिक अखबार है, तो अमेरिका में वाल स्ट्रीट जर्नल है। लेकिन भारत में इस क्षेत्र में विकल्प बढ़ रहे हैं। इससे हमें हर तरह की राय और विश्लेषण देखने को मिल रहे हैं। यह अच्छी बात है कि बिजनेस भास्कर जैसे अखबार से सही मायने में भारतीय बिजनेस पत्रकारिता का विस्तार होगा।’
जब उनसे पूछा गया कि आपके हिसाब से बिजनेस अखबार में क्या-क्या होना चाहिए तो उन्होंने कहा, ‘आपको महिलाओं, बच्चों, ग्रामीण क्षेत्र, पंचायती राज और पर्यावरण के मुद्दों को भी अहमियत देनी चाहिए। दिल्ली के बड़े समाचार पत्रों में इन मुद्दों को वाजिब जगह नहीं मिलती है।’
मेट्रो शहरों तक सीमित कुछ बड़े अखबारों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह अखबार क्षेत्रीय स्तर पर हो रही घटनाओं और मुद्दों की जानकारी नहीं देते हैं।’ बिजनेस भास्कर की तरफ से जब उन्हें बताया गया कि हम खबरों को ज्ञान का स्रोत समझते हैं और इसी के बल पर अपना आधार पुख्ता करेंगे, तो प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ बड़े अखबार सिर्फ मार्केटिंग को ही विस्तार का आधार समझते हैं। उनका जोर था कि खबर के बल पर समाचार-पत्र को अपना आधार बनाना चाहिए।
बिजनेस भास्कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मध्य वर्ग की बुलंद आवाज बन सकता है।
- डॉ. मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री