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जयपुर. ट्रक ऑपरेटर्स को सेवाकर से मुक्त करने का फायदा राजस्थान के करीब 5 लाख वाहन मालिकों को मिलेगा। इसके बाद 2 जुलाई को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल में अब ट्रक ऑपरटेर्स का शामिल होना भी मुश्किल है।
केन्द्र सरकार द्वारा ट्रकों सहित माल ढुलाई वाले सभी वाहनों को सेवाकर के दायरे में लेने से देशभर के ट्रक ऑपरेटर्स में खलबली मच गई थी। इससे माल भाड़े में बढ़ोतरी होने के साथ ही आम जरूरत की चीजों के दाम और बढ़ने की आशंका थी। ऑपरेटर्स का मानना है कि केन्द्र सरकार के इस कदम से काफी हद तक महंगाई रोकने के प्रयासों को बल मिलेगा।
राजस्थान को करोड़ों का फायदा
जयपुर से दिल्ली जाकर आने का 6 पहिया ट्रक का किराया 10 हजार रु. है। इस पर 12.5%की दर से 1,250 रु. का सर्विस टैक्स चुकाना होता। प्रदेश में 3 लाख ट्रकों सहित माल ढोने वाले 5 लाख वाहन हैं।
हिसाब-किताब रखने से मुक्ति
ट्रक मालिकों को अब सेवाकर का हिसाब रखने से भी मुक्ति मिली है। यदि सेवाकर के दायरे में आते तो उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता व रिटर्न भरना पड़ता है।
केन्द्र सरकार ने ट्रक ऑपरेटर्स को सेवाकर के दायरे से बाहर करके जनता को बड़ी राहत दी है। यदि ट्रक ऑपरेटर्स को सेवाकर के दायरे में लिया जाता तो माल भाड़ा बढ़ता और इससे आम जरूरत की चीजों के दाम बढ़ते। केन्द्र के इस फैसले का ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन स्वागत करती है। इससे दो जुलाई से होने वाली हड़ताल में ट्रक ऑपरेटर्स का शामिल होना अब मुश्किल है।
—वेदभूषण सेठी, अध्यक्ष राजस्थान ट्रक ऑपरटेर्स यूनियन।
अब पेट्रोल-डीजल की दरों में कमी की मांग
राजस्थान ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि डीजल और पेट्रोल की दरों में भी कुछ कमी करके उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। अन्यथा यहां के ट्रक ऑपरेटर्स हड़ताल पर जा सकते हैं।
यूनियन के अध्यक्ष वेदभूषण सेठी ने कहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के कहने पर मध्य प्रदेश और गुजरात सहित भाजपा शासित लगभग सभी प्रदेशों ने राहत दी है, जबकि राजस्थान सरकार चुप्पी साधे हुए हैं।