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नसीब नहीं होता पानी भी

बीकानेर. wa संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में रोगियों और उनके परिजनों को इन दिनो पड़ रही भीषण गर्मी में भी ठंडा पानी नसीब नहीं हो रहा है। अस्पताल में 14 में से 11 प्याऊ अर्से से बंद हैं। लोगों को शीतल जल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। पीबीएम अस्पताल में सेवा के उद्देश्य से दानदाता धन तो लगाते हैं लेकिन निर्माण के बाद सार संभाल नहीं हो पाती।

अस्पताल प्रशासन संसाधनों की कमी बताकर अपना पल्ला झाड़ लेता है और दानदाता पैसे देकर वापस उस सम्पत्ति को भूल जाते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक रोगियों और उनके परिजनों की आवाजाही रहती है।

भीषण गर्मी में पानी की जरूरत भी सभी को होती है लेकिन ठंडा पानी कहीं भी नहीं मिलता। अस्पताल के पूरे परिसर में विभिन्न स्थानों पर पानी की 14 प्याऊ हैं, जिनमें से 11 बंद पड़ी हैं।

आश्चर्य तो इस बात का है कि भीषण गर्मी को देखते हुए भी बंद प्याऊ को वापस शुरू करने की तरफ अस्पताल प्रशासन का ध्यान नहीं गया। इनमें कुछ प्याऊ ऐसी हैं, जिन्हें स्थायी रूप से ही बंद किया जा चुका है लेकिन उनके स्थान पर नई प्याऊ नहीं खोली जा सकी।

केज्युअलिटी में मारवाड़ जनसेवा समिति के सहयोग से वाटरकूलर संचालित है वह भी पिछले दस दिनों बाद अब ठीक हुआ है। उसका कंप्रेशर खराब था, जिसे जनसहयोग से बदलवाया गया है। इसके अलावा भोजनालय और एफ वार्ड के पास स्थित प्याऊ ही चालू हालत में है। दिन के समय आउटडोर के दौरान बाहर किसी भी दुकान से पानी पीकर प्यास बुझाई जा सकती है लेकिन रात को वार्ड में भर्ती रोगियों के परिजनों को पीने के लिए पानी नहीं मिलता।

अस्पताल परिसर में होलसेल भंडार की दुकानों के पास वाली प्याऊ सबसे पुरानी है। उस पर लाखों रुपए लग चुके हैं लेकिन वह भी पिछले दो महीने से बंद है। चेतक ने उस प्याऊ को संचालित करने का जिम्मा उठाया था। अब उसकी सार-संभाल ही नहीं हो पा रही है।

स्थिति यह है कि भंडार दुकानों पर लगे फ्रिज में दवाइयां कम ठंडे पानी की बोतले अधिक मिलती हैं। वह पानी दुकानदारों अधिक ग्राहकों के पीने के काम आता है।

कुछ प्याऊ इसलिए बंद करवानी पड़ी, क्योंकि लोग बर्तन व कपड़े धोते थे। खराब प्याऊ को चालू करवाया जा रहा है। केज्युअलिटी के वाटरकूलर का कंप्रेशर बदलवा दिया गया है। अब वह ठीक है। बाहर वाली प्याऊ के लिए चेतक के अधिकारियों को कहा गया है। वह भी शीघ्र शुरू हो जाएगी।
-डॉ. विनोद बिहाणी, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल

शिशु चिकित्सालय में भी नहीं है ठंडा पानी
शिशु चिकित्सालय में भी रोगियों और उनके परिजनों को ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। अस्पताल के अंदर वाली प्याऊ को बंद कर दिया गया है। परिसर में डेयरी के पास वाली प्याऊ भी अर्से से बंद पड़ी है। नाले के पास वाली प्याऊ में वाटरकूल नहीं है। अंदर प्याऊ नहीं होने के कारण रात के समय महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। बिस्तर पर बच्चे को अकेले छोड़कर पानी पीने के लिए वह अस्पताल से बाहर नहीं जा सकती। पूरी रात उन्हे प्यासा ही रहना पड़ता है। सुबह घर से किसी पुरुष के पहुंचने पर ही उन्हे पानी नसीब होता है।





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