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उत्पाती बंदर से दहशत

आबूरोड. गुरुवार सुबह उत्पाती बंदर के पास एक अन्य बंदर आ पहुंचा तो उसने अन्य बंदर पर हमला कर दिया। इतना बुरी तरह से वार किया कि अन्य बंदर के पेट से आंते बाहर निकल आई। लोगों ने यह मंजर देखा तो वे सहम गए। उल्लेखनीय है कि उत्पाती बंदर ने अब तक एक दर्जन से भी अधिक लोगों को जख्मी किया है।

घायल बंदर को लोगों ने पशु चिकित्सक के यहां ले जाकर ईलाज करवाया किंतु उसकी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई। लोगों में बंदर के उत्पात को लेकर रोष व्याप्त है। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि बंदर को पकड़ने में अभी दो विभागों के बीच खींचतान चल रही है और इससे आम लोग दहशतजदा हो रहे है।

बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी किसकी
बंदर पकड़ने के लिए वन विभाग नगर पालिका का क्षेत्र होने का हवाला देकर जिम्मेदारी पालिका पर डाल रहा है तो पालिका इसके लिए वन विभाग को जिम्मेदार बता रही है। इधर जिला प्रशासन ने सभी संबंधित महकमो को तालमेल के साथ उत्पाती बंदर को पकड़ने के लिए निर्देश दिए है।

एयरगन चलाने के आदेश हो चुके हैं
उत्पाती या पागल जानवरों को पकड़ने के लिए एयरगन में इंजेशन डालकर दागा जाता है और इसके लिए जिला कलेक्टर की स्वीकृति आवश्यक है। जिला कलेक्टर ने बंदर पर अंकुश के लिए यह स्वीकृति दे दी,लेकिन वन विभाग अभी तक संसाधन नहीं जुटा पाया है और बंदर का आतंक बरकरार है।

उत्पात का सफर
शहर के आबकारी, घौसीमौहल्ला, हरीजन बस्ती आदि क्षेत्र में गत माह से बंदर का आतंक है। बंदर ने अक्टूबर माह 2007 में कुम्हार मौहल्ला स्थित एक महिला इंद्रा अग्रवाल को हमले में बुरी तरह घायल कर दिया था। इसके बाद बंदर ने 17 जून को प्रवीण पुत्र टीकमचंद, रामधन पुत्र गोविंद चारण को बुरी तरह जख्मी कर दिया था।

घटना में दोनों के गंभीर घाव हुए थे। 30 अप्रैल 08 को 11वर्षीय जिशांत पुत्र चांद मोहम्मद को बंदर ने घायल कर दिया जिसे इलाज के लिए गुजरात रैफर किया,लेकिन उसकी मृत्यु हो गई। 12 मई को छत पर सो रहे नारायण सिंह पर बंदर ने हमला कर उसकी पीठ व कूल्हे पर गम्भीर घाव किए। 24 मई को मुकेश कुमार बंदर के हमले का शिकार हुआ। 25 जून को शिवा पर बंदर ने हमला कर उसे घायल कर दिया जिसे ईलाज के लिए गुजरात रैफर किया गया।





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