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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. यकीन करना जरा मुश्किल है, लेकिन यह सच है कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के थ्री बेडरूम फ्लैट के लिए 1.56 करोड़ रुपए की बोली लगाई गई। चंडीगढ़ में लंबे समय से प्रॉपर्टी का काम करने वालों को यह बात हजम नहीं हो रही है कि हाउसिंग बोर्ड के थ्री बेडरूम फ्लैट के लिए 1.56 करोड़ की बोली भी लगाई जा सकती है। वो भी तब जबकि मार्केट में इससे कहीं सस्ते और अच्छे फ्लैट उपलब्ध हों।
चंडीगढ़ में बीते 30 साल से प्रॉपर्टी का काम कर रहे मंगत राय कहते हैं कि 1.50 करोड़ रुपए में तो किसी भी सेक्टर में दस मरले का इंडीपेंडेंट प्लॉट या मकान लिया जा सकता है जहां हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट से कहीं बेहतर एक नहीं, तीन फ्लैट बनाए जा सकते हैं। इधर हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन मोहनजीत सिंह यह मानते हैं कि चंडीगढ़ में बसने का सपना महंगा होता जा रहा है, क्योंकि यहां जमीन कम है।
वे यह भी कहते हैं कि हाउसिंग बोर्ड के मकानों की कीमत मार्केट से ज्यादा नहीं। एश्योर्ड अलॉटमेंट स्कीम का तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि भले ही इसके तहत सबसे ऊंची बोली 1.56 करोड़ रुपए की लगाई गई हो, लेकिन फ्लैट अलॉट किए जा रहे हैं 68 लाख रुपए पर।
यह बोली सबसे कम थी। स्कीम के तहत 16 फ्लैट रखे गए थे और इनकी रिजर्व प्राइस (प्रति फ्लैट) 39.57 लाख थी। वीरवार को खोली गई बिड्स के आधार पर दो बेडरूम का फ्लैट 40,54,971 रुपए में अलॉट करने का फैसला हुआ। इसकी रिजर्व प्राइस 29.14 लाख रुपए थी। इसी तरह वन बेडरूम फ्लैट के लिए 23 लाख रुपए कीमत तय की गई। इसकी रिजर्व प्राइस 17.15 लाख रुपए थी।
मार्केट पर सीधा असर, कीमतें बढ़ने की आशंका
प्रॉपर्टी गुरु मानते हैं कि बोर्ड की इस स्कीम का सीधा असर मार्केट पर पड़ेगा। डीलर सुनील कुमार कहते हैं आम धारणा यह है कि बोर्ड के फ्लैट मार्केट रेट से कहीं सस्ते होते हैं। अगर बोर्ड का फ्लैट अगर 30 लाख का है तो मार्केट का रेट 45-50 लाख होगा।
बोर्ड की कीमत को प्रॉपर्टी के धंधे में एक तरह का सरकारी सर्टीफिकेट माना जाता है। अब बोर्ड का फ्लैट ही 68 लाख का होगा तो कोऑप्रेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाटियों में भी फ्लैट बेचने वाले इतनी ही कीमत मांगना शुरू कर देंगे, जबकि मार्केट इससे नीचे है। जानकारों का यह भी कहना है कि फ्लैट्स की कीमत बढ़ने का सीधा असर इनके किराए पर भी पड़ेगा।
क्या है एश्योर्ड अलॉटमेंट
बोर्ड ने यह स्कीम उन लोगों के लिए शुरू की थी जो ऊंची बोली लगाकर बोर्ड से सीधा फ्लैट खरीद सकें। इसके तहत कुछ फ्लैट रिजर्व रखे जाते हैं। इनके लिए एप्लीकेशन्स मंगवाई जाती हैं, जिनमें लोगों से फ्लैट की बोली लगाने के लिए कहा जाता है।
फ्लैटों की संख्या के हिसाब से उतने ही टॉप बिडर चुने जाते हैं। इन सभी को फ्लैट दिया जाता है, लेकिन सबसे ऊंची बोली पर नहीं बल्कि इस ग्रुप में जो सबसे कम बोली लगाई गई हो उस पर। मसलन 10 फ्लैट्स के लिए 10 लोगों ने 50 लाख या इससे ज्यादा की बोली लगाई, तो इन सभी को 50 लाख रुपए के हिसाब से फ्लैट अलॉट होंगे न की सबसे ऊंची बोली पर।