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सबने माना, पुरातत्व महकमे का हक

कोटा. किशोर सागर व जगमंदिर के मामले में प्रशासन व नगर विकास न्यास को शुक्रवार को पूरी तरह बैकफुट पर आ गए। उन्हें स्वीकार करना ही पड़ा कि दोनों पुरा-स्मारक, पुरातत्व विभाग की सम्पत्ति हैं। राज्य सरकार के अडॉप्ट अ मॉन्यूमेंट योजना के तहत लीज पर दिए जाने के फैसले को भी मंजूर कर लिया गया। लगातार तीन बार स्थगित होने के बाद शुक्रवार को हुई बैठक में पुरातत्व विभाग के अधीक्षक के.एल.मीणा ने जगमंदिर व किशोर सागर के संबंध में रिकार्ड प्रस्तुत किए।

उन्होंने 1968 में जारी गजट नोटिफिकेशन की प्रति भी बैठक में रखी। दस्तावेज देखने के बाद बैठक में उपस्थित यूआईटी, आरयूआईडीपी, पर्यटन व अन्य विभागों के अफसरों ने स्वीकार लिया कि यह संपत्ति पुरातत्व विभाग की है, उसकी सहमति के बिना किशोरसागर और जगमन्दिर में नगरीय निकाय कोई काम नहीं करवा सकते।

जोरदार बहस
बैठक में न्यास सचिव व पुरातत्व विभाग के अधीक्षक के बीच जोरदार बहस हुई। विवाद न्यास सचिव के यह कहने पर हुआ कि पुरातत्व विभाग शहर के विकास में बाधक बन रहा है। उसके पास बजट नहीं है, कहां से विकास करवाएंगे? तालाब की हालत जर्जर हो गई, दीवारों को कहां से बनवाएंगे?

पुरातत्व विभाग के मीणा ने जवाब दिया कि विकास से उन्हें गुरेज नहीं है लेकिन, पहले विभाग की अनुमति तो लें। यूआईटी व प्रशासन राठौड़ी से काम करवा रहा है, यह सहन नहीं किया जाएगा। इस पर न्यास सचिव के तेवर ठंडे पड़ गए। उन्होंने पूछा, वहां चल रहा निर्माण क्या बंद करवा दिया जाए? मीणा ने पलटकर कहा, यह सोचना उनका काम है, जिन्होंने बिना स्वीकृति के कार्य करवाया। पुरातत्व महकमा लीज पर देने का निर्णय ले चुका है, इसलिए कोई दूसरा फैसला नहीं हो सकता।

यह हुआ फैसला..आखिर बैठक में निर्णय किया गया किशोर सागर व जगमंदिर गजट नोटिफिकेशन के अनुसार पुरातत्व विभाग की संपत्ति हैं। यदि किसी विभाग को कोई विकास कार्य करवाना भी है तो पहले सहमति लेनी होगी। उसके बिना कार्य नहीं होगा।

मंसूबे धराशायी
बैठक के निर्णय से सत्तारूढ़ दल के उन नेताओं के मंसूबे धरे रह गए, जो इन पुरा-स्मारकों पर आरयूआईडीपी और यूआईटी से नौ करोड़ रुपए से अधिक खर्च करवा चहेतों को ठेके पर देने की योजना बना चुके थे। अब यूआईटी की तालाब का आकार घटा सड़क चौड़ा करने व मनोरंजन के संसाधन लगाने की बीओटी योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई है।

कुछ नहीं कर सकते
किशोर सागर व जगमंदिर पुरातत्व विभाग की संपत्ति है। बीओटी आधार पर 15 करोड़ की जो योजना बनाई थी, उस पर पुरातत्व विभाग सहमति देगा तो काम होगा, अन्यथा नहीं। बैठक में इसे स्पष्ट कर दिया गया है।
-एस.एल शर्मा, यूआईटी सचिव

अब जबर्दस्ती नहीं
न्यास व प्रशासन ने जगमंदिर व किशोर सागर तालाब को पुरातत्व विभाग का मान लिया है। इसलिए अब विभाग जो चाहेगा वही काम होगा। अब किसी को राठौड़ी नहीं करने देंगे। वैसे इन्हें लीज पर देने का फैसला हो ही चुका है।
-के.एल. मीणा, अधीक्षक, पुरातत्व विभाग





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