कोटा.
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की ओर से हाल ही में घोषित बी-टेक प्रथम सेमेस्टर के परिणामों में केवल 47 फीसदी छात्र ही सफल हुए हैं। 5
3 फीसदी छात्रों के फेल हो जाने से राज्य सरकार के उस निर्णय पर अंगुलियां उठने लगी हैं जिसमें आरपीइटी काउंसलिंग के बाद बारहवीं कक्षा में 40 फीसदी अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीधा प्रवेश दिया गया था। इससे बी-टेक प्रथम सेमेस्टर में 20 हजार छात्रों को दाखिला तो मिला, लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा पहला इम्तिहान भी पार नहीं कर पाए।
पिछले साल भी प्रवेश नियमों में ढील के कारण तकनीकी विवि में बीई प्रथम वर्ष का परिणाम 46 फीसदी रहा था। विवि ने इसी साल से बीई की जगह बी-टेक की डिग्री करने के साथ प्रथम वर्ष से ही सेमेस्टर सिस्टम लागू किया था। नियमों में यह शिथिलता आगे भी जारी रही तो कम प्रतिशत वाले छात्र बी-टेक की 3 साल की डिग्री 8 साल में भी पूरी नहीं कर सकेगे। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की रिक्त सीटों को भरने का यह कदम छात्रों के भविष्य को चौपट कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छात्र-छात्राओं की मार्कशीट देखकर कंपनियां भी उन्हें लेने से कतराएंगी। कारण कि इनकी मार्कशीट में फेल अंकित रहेगा। फिर भले ही उन्हें सेकंड समेस्टर में प्रमोट कर दिया गया हो और बेक आए विषयों को वे अगले सेमेस्टर में क्लीयर क्यों न कर लें।
इंजीनियरिंग कॉलेजों की 25 हजार सीटों के लिए इस साल 49 हजार छात्रों ने आरपीईटी दी है जबकि पिछले साल 27 हजार परीक्षार्थी इसमें शामिल हुए थे। इससे पूर्व राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर इंजीनियरिंग परीक्षाएं आयोजित करता था। तब 2005-06 में प्रथम वर्ष में करीब 65 फीसदी परीक्षा परिणाम रहा था। उस समय द्वितीय वर्ष से सेमेस्टर सिस्टम लागू था।
उधर, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री ने हाल ही कहा है कि इस साल जुलाई तक राज्य में 100 इंजीनियरिंग कॉलेज हो जाएंगे, लेकिन नए कॉलेजों में सभी ब्रांचों की सीटों को भरना एक बड़ी समस्या होगी। कारण कि छात्र गुणवत्ता नहीं होने से इनमें प्रवेश लेने में रुचि नही ले रहे हैं।
उपस्थिति 50 फीसदी रह गई
इंजीनियरिंग कॉलेज में बी-टेक प्रथम सेमेस्टर के छात्रों की उपस्थिति में निरंतर गिरावट हो रही है। कमजोर छात्र कक्षाओं में आना ही नही चाहते हैं जिससे उनकी उपस्थिति घटकर 50 फीसदी रह गई है।
क्या है सेमेस्टर प्रक्रिया
राजस्थान तकनीकी विवि ने 2007-08 से बी-टेक के प्रथम वर्ष में 6-6 माह के दो सेमेस्टर की प्रणाली लागू की। पहले और दूसरे सेमेस्टर में 5 पेपर थ्योरी और 5 प्रेक्टिकल के होते हैं। दोनों सेमेस्टर (प्रथम वर्ष) के सभी विषयों को मिलाकर न्यूनतम 25 फीसदी पेपर पास करने पर इयर बेक नहीं होगा। प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम में जो छात्र फेल हुए हैं, उन्हें दूसरे सेमेस्टर में प्रमोट तो कर दिया जाएगा लेकिन उन्हें बेक परीक्षा देनी होगी। इसमें पास होने पर वे तीसरे और चौथे सेमेस्टर (द्वितीय वर्ष) मेंप्रमोट हो जाएंगे।
इनका कहना है..
बारहवीं कक्षा में कम प्रतिशत वाले 90 फीसदी छात्रों का इंजीनियरिंग पढ़ने में रुझान कम रहता है। केवल 10 फीसदी ही इस ओर पूरा ध्यान देते हैं। उच्च तकनीकी शिक्षा में क्वांटिटी की बजाय क्वालिटी पर जोर दिया जाना चाहिए।
- प्रो.केवीएस राव, समन्वयक, आरपीईटी
-यह तथ्य वास्तव में चिंताजनक है। इसके लिए विश्वविद्यालय, कॉलेज प्रबंधन व शिक्षक-सभी जिम्मेदार हैं। नए कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्टर की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है। विश्वविद्यालय ने इस दिशा में काम शुरू किया है, सरकार से चर्चा करके तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
-प्रो. दामोदर शर्मा, कुलपति, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा
एआईसीटीई के मापदंड भी दरकिनार
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए बारहवीं कक्षा में न्यूनतम 60 फीसदी अंकों की अनिवार्यता के दिशा-निर्देश दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार ने इसमें ढील देते हुए पहले 45 और फिर रिक्त सीटों पर 40 फीसदी अंक वालों को भी सीधे प्रवेश की छूट दे दी है।
रिजल्ट की समीक्षा करेंगे
तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी से सवाल-जवाब
बी-टेक प्रथम सेमेस्टर का इस साल रिजल्ट 47 फीसदी ही रहने का क्या कारण रहा?
इसका जवाब तो विवि ही दे सकता है।
क्या पिछले साल 45-40 फीसदी अंकों पर इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीधा प्रवेश देना इसका कारण रहा?
आरपीईटी में मेरिट के आधार पर ही प्रवेश दिए गए थे। रिक्त सीटों पर कम प्रतिशत वाले छात्रों को प्रवेश दिए गए।
क्या इस कदम से गुणवत्ता पर असर पड़ा है?
यह एक निरंतर प्रक्रिया है जो कॉलेज अच्छे परिणाम नहीं देंगे वे स्वत: बंद हो जाएंगे।
प्रवेश के समय एआईसीटी के मापदंड (60 फीसदी अंक) को सरकार ने दरकिनार क्यों कर दिया?
प्रवेश परीक्षा में नियमों की पालना हुई है। काउंसलिंग के बाद खाली सीटों पर छात्रों को अतिरिक्त अवसर दिया गया।
सुधार के लिए क्या कदम उठाएंगे?
रिजल्ट का अध्ययन करके समीक्षा करेंगे। इम्प्रूवमेंट के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
क्या
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के हाल ही घोषित बी-टेक प्रथम सेमेस्टर के परिणामों में 47 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ही पास हो पाए हैं। शेष 53 फीसदी फेल हो गए। इन्हें सेकंड सेमेस्टर में तो प्रमोट कर दिया गया है, लेकिन इनके बेक आ गई है।
क्यों
इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली सीटों को भरने के नाम पर सरकार का नियमों में ढील देना, आरपीईटी पास किए बिना ही 40 प्रतिशत अंकों से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों को भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीधा प्रवेश दे देना, 10 में से 2 पेपर पास करते ही सेकेंड सेमेस्टर में प्रमोट कर देना
आगे क्या
कम प्रतिशत वाले छात्र निर्धारित 3 साल में बी-टेक की डिग्री पास नहीं कर पाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें डिग्री क्लीयर करने में 3 की बजाए 8 साल तक लग जाएंगे।