उदयपुर. राजस्व गांव पायड़ा के साबिक आराजी नंबर 553 हाल आराजी संख्या 740 किस्म आबादी यूआईटी के नाम दर्ज है। इस जमीन पर श्रीलाल पुत्र जैता लोहार का कब्जा था। इसने 11 अगस्त, 03 को पुत्र तुलसीराम लोहार के नाम वसीयत की थी। श्रीलाल की 10 दिसंबर, 03 को मृत्यु हो गई।
तुलसीराम ने यह जमीन 16 जनवरी, 08 को कृषि मंड़ी व्यापार मंडल के अध्यक्ष रमेश चौधरी पुत्र भंवरलाल चौधरी व कुण निवासी शिखर जैन पुत्र मदनलाल जैन को पांच लाख रुपए में बेच दी। यह रजिस्ट्री उप पंजीयन कार्यालय (द्वितीय) में हुई और केशवनगर निवासी रमेशचंद्र दोशी पुत्र चतरलाल दोशी, भूपालपुरा निवासी हितैष पुत्र सरेश चित्तौड़ा व धाबाईजी की बाड़ी, अशोकनगर निवासी चमन चौधरी पुत्र रमेश चौधरी की साक्षी में हुई।
बेचने से पहले हुआ खेल
इस जमीन को बेचने में कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ रहा है। इन लोगों ने जमीन बेचने से पूर्व तुलसीराम लोहार से इस जमीन पर भवन निर्माण की स्वीकृति के लिए नगर परिषद की भवन अनुमति समिति में स्वीकृति के लिए फाइल लगवाई। इन लोगों ने अपने प्रभाव से नगर परिषद से निर्माण स्वीकृति जारी करवा दी।
यह निर्माण स्वीकृति तत्कालीन भवन अनुमति समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र बापना के कार्यकाल में 12 जून, 06 को जारी हुई। जब भू-माफिया पूरी तरह से आश्वस्त हो गए, तो उन्होंने इस जमीन का सौदा कर लिया। उसके बाद अब रमेश चौधरी ने निर्माण स्वीकृति के लिए नगर परिषद में नए सिरे से फाइल लगाई, जिसे निरस्त कर दिया है। इधर, यूआईटी सचिव ने इस जमीन पर यूआईटी का हक बताते हुए समिति को निर्माण स्वीकृति जारी नहीं करने को कहा है और पूर्व में जो निर्माण स्वीकृति जारी की गई, वह किस आधार पर की गई है। इस संबंध में जवाब मांगा है।
रजिस्ट्री के दस्तावेज मंगवाए
इस जमीन के बेचान को लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज मंगवाए गए हैं। यूआईटी की जमीन बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जमीन यूआईटी के नाम पर दर्ज हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बाद भी नगर परिषद से निर्माण स्वीकृति जारी हुई। यह आश्चर्य का विषय है।
-जोगाराम जांगिड़, सचिव, यूआईटी
न्यायालय में चल रहा है मामला
यह जमीन मैंने खरीदी है। अभी कोर्ट में मामला चल रहा है। कोर्ट ने हमें स्टे भी दे रखा है।
-रमेश चौधरी, अध्यक्ष, कृषि मंडी व्यापार मंडल