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जाने तू, या जाने न

फिल्म रिव्यू.jane tu आमीर खान की यह फिल्म नानी-दादी के कहानी सुनाने की स्टाइल मे बनाया गया है। फिल्म में पांच बच्चे हैं। रोतलू, जिग्गी, बॉम्बस और शालीन और माला। उनमें एक दूसरे को कहानी सुनाने की होड़ लग जाती है। फिर शुरू होती है जय और अदिति की कहानी।

जय की कहानी कुछ इस तरह की है कि वो अरावली क्षेत्र के राजपूताना प्रदेश का एक ऐसा पात्र है जिसे हिंसा करना, लड़ना-झगड़ना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। एक दिन वो अदिति से मिलता है।

अदिति एक ऐसी पात्र है जिसे केवल लड़ने झगड़ने का शौक है। किसी बात पर अदिति उससे लड़ने के लिए ललकारती है। तब जय लड़ने से मना कर देता है। ऐसे में अदिति सोचती है कि इस पूरे क्षेत्र में जय से कायर और डरपोक लड़का नहीं है।

अब कहानी में सभी बच्चे आपस में लड़ने लगते हैं। कोई कहता है जय अच्छा है, तो कोई कहता है कि अदिति अच्छी है। फिर सभी लड़ना छोड़कर पूछते हैं आगे क्या होता है? अफकोर्स आगे दोनों पात्रों को प्यार हो जाता है। फिर क्या होता है फिल्म में, जानने के लिए इंतजार करें फिल्म के रिलीज होने का।

निर्माता: मंसूर खान, आमीर खान
निर्देशक: अब्बास टायरवाला
कलाकार: इमरान खान, जेनिला डिसूजा
संगीतकार: ए आर रहमान





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आपके विचार
iqbal ahmad
Saturday, 28th Jun 2008, 14:58
aamir ki oh har film special hoti hai. so ye film bhi special hi hogi.
mani kant mishra
Sunday, 29th Jun 2008, 10:38
it would be hit movi